21 अगस्त को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई की घोर निंदा रोहित कौशिक
21 अगस्त को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर हुए शर्मनाक पुलिस लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
ब्राह्मण नेता रोहित कौशिक ने कहा की 21 अगस्त को दिल्ली जंतर मंतर पर सवर्ण समाज के द्वारा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे सवर्ण समाज के लोग सवर्ण समाज के छात्रों पर महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया, उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में दिल्ली के बॉर्डरों पर छोड़ दिया गया। एक लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने का अधिकार हर नागरिक को है, इस प्रकार का दमनकारी रवैया अत्यंत निंदनीय है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार सवर्ण समाज के न्यायोचित आंदोलन से घबराई हुई है। यह वही सवर्ण समाज है जिसने अपने वोटों की ताकत से केंद्र और प्रदेशों में भाजपा की सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। आज उसी समाज की अनदेखी करना और उसकी आवाज को लाठी के बल पर दबाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सवर्ण समाज की स्पष्ट मांग है:
- आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव किया जाए। 2. आरक्षण का लाभ जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक आधार पर जरूरतमंद और गरीब परिवारों को दिया जाए, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो। 3. यदि ऐसा संभव नहीं है, तो आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए ताकि समाज में कोई भेदभाव न रहे और सभी नागरिक एक समान, सामान्य रूप से जीवन यापन कर सकें।
हमारा आंदोलन किसी जाति या वर्ग के विरोध में नहीं, बल्कि समानता और सामाजिक न्याय के पक्ष में है। हम केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से मांग करते हैं कि इस बर्बर कार्रवाई की जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
सवर्ण समाज अब जाग चुका है और अपने हक के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

