मध्य प्रदेश में कथित चावल घोटाले ने बड़ा रूप ले लिया है।
आरोप है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से खराब चावल के नाम पर फोर्टिफाइड (पोषणयुक्त) चावल को एथेनॉल प्लांट भेजने के बजाय राइस मिलर्स तक पहुंचा दिया गया, और बाद में पूरा स्टॉक ही गायब कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि करीब 50 लाख क्विंटल चावल (लगभग 1200 से 2000 करोड़ रुपये) इस खेल में शामिल है। यह वही चावल था जो सरकारी राशन के जरिए बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए भेजा जाना था।
जांच में सामने आया कि अधिकारियों, राइस मिलर्स और एथेनॉल प्लांट से जुड़े लोगों की मिलीभगत से खराब चावल की जगह अच्छा फोर्टिफाइड चावल आवंटित किया गया। योजना यह थी कि फोर्टिफाइड चावल मिलर्स के पास रखकर उसकी जगह खराब चावल प्लांट भेज दिया जाए और मोटा मुनाफा कमाया जाए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब ट्रक एथेनॉल प्लांट की जगह मिलों में पकड़े गए। इसके बाद कई ट्रक गायब कर दिए गए। पुलिस ने अब तक 18 ट्रक जब्त किए हैं, 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है और 4 गिरफ्तारियां हुई हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताया।

