अखिलेश यादव ने जिन आरोपों का जिक्र किया, उनका केंद्र एसआईटी के सदस्य विजय विश्वास पंत हैं।
उनके मुताबिक, विजय विश्वास पंत के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420), जालसाजी (धारा 465) और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज है।
आरोप है कि एक शिकायतकर्ता से कथित तौर पर कमीशन मांगा गया और कमीशन न मिलने पर सरकारी अभिलेखों में फ्लूइड (सुधार द्रव्य) लगाकर कथित रूप से हेरफेर किया गया। यह भी दावा किया जा रहा है कि शिकायतकर्ता को एफआईआर दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट तक जाना पड़ा, जिसके बाद अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ।
मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (Final Report) को भी अदालत द्वारा निरस्त किए जाने का दावा किया जा रहा है। इन्हीं आरोपों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी पर खुद धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर जैसे गंभीर आरोपों का मामला लंबित हो, वह राम मंदिर चढ़ावा गबन जैसे संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच कैसे कर सकता है।
हालांकि, इन आरोपों पर विजय विश्वास पंत की ओर से सार्वजनिक रूप से क्या जवाब दिया गया है या उनका पक्ष क्या है, यह भी सामने आना बाकी है।

