राजधानी दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में शुक्रवार को ‘लोकआंदोलन न्यास’, ‘मातृ सदन’ (हरिद्वार), ‘अखिल भारतीय पंचायत परिषद’ एवं ‘किसान मंच’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘राष्ट्रीय कार्यकर्ता बैठक’ और ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2026’ समारोह में देश की भावी राजनीति, कृषि संकट और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़े जन-आंदोलन की मजबूत बुनियाद रखी गई।

राष्ट्रीय गौरव सम्मान: दिल्ली में किसान और संत समाज ने फूंका व्यवस्था परिवर्तन का बिगुल, कॉरपोरेट और दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुटता का महा-आह्वान
कांस्टिट्यूशन क्लब में जुटे देश भर के प्रमुख सामाजिक संगठन; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में 31 तारीख को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान; 25 कर्मयोगियों को मिला ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2026’।
नई दिल्ली, 26 जून 2026।


राजधानी दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में शुक्रवार को ‘लोकआंदोलन न्यास’, ‘मातृ सदन’ (हरिद्वार), ‘अखिल भारतीय पंचायत परिषद’ एवं ‘किसान मंच’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘राष्ट्रीय कार्यकर्ता बैठक’ और ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2026’ समारोह में देश की भावी राजनीति, कृषि संकट और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़े जन-आंदोलन की मजबूत बुनियाद रखी गई।

इस महासमागम में देश भर के शीर्ष किसान नेताओं, प्रबुद्ध विचारकों और संतों ने एकजुट होकर वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था, कॉरपोरेट परस्त नीतियों और संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। “कृषि, माँ गंगा, जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा ही राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च मार्ग है” के मूल संकल्प के साथ वक्ताओं ने देश की प्रशासनिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ‘संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन’ की आवश्यकता पर बल दिया। राष्ट्रीय लोक आंदोलन की कार्याध्यक्ष कल्पना इनामदार ने देश में व्याप्त विसंगतियों और चुनाव प्रणालियों की अनियमितताओं के खिलाफ सभी सामाजिक संगठनों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
इस दौरान नदियों और अदालतों में कॉरपोरेट के बढ़ते दखल पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

किसान मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता भोपाल सिंह चौधरी ने गंगा और उसकी सहायक परियोजनाओं के तहत बन रहे बांधों का पुरजोर विरोध करते हुए नदियों की अविरलता को समय की सबसे बड़ी मांग बताया, वहीं मातृसदन के प्रमुख मठाधीश स्वामी शिवानंद सरस्वती महाराज ने व्यवस्था के सड़-गल जाने का आरोप लगाते हुए छोटे सुधारों के बजाय आर-पार की लड़ाई का आह्वान किया। आंदोलन को और धार देते हुए वरिष्ठ किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारतीय कृषि के लिए आत्मघाती व कॉरपोरेट की गुलामी का जरिया बताते हुए आगामी 31 तारीख को देशव्यापी महा-आह्वान और रणनीति तैयार करने के लिए 1 जुलाई को चंडीगढ़ में राष्ट्रीय महाबैठक बुलाने का बड़ा ऐलान किया। इसके साथ ही, किसान मंच के संरक्षक पीयूष जोशी ने सरकार द्वारा आंदोलनकारियों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने और सरकारी एजेंसियों के जरिए दमन का माहौल बनाने का आरोप लगाया। प्रख्यात किसान नेता बि.एम. सिंह ने कॉरपोरेट-अदालत गठजोड़ को चुनौती देते हुए सड़क से अदालत तक निर्भीक कानूनी लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया, जबकि उत्तराखंड के किसान नेता कार्तिक उपाध्याय ने गंगा में जारी अवैध खनन और हिमालयी क्षेत्रों की उपेक्षा को लेकर तीखा प्रहार किया।
समारोह के उत्तरार्ध में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 25 कर्मयोगियों को ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया। सम्मानित होने वाले प्रमुख चेहरों में चौधरी शाह आलम सिद्दीकी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा), शब्दाब केसर (भारतीय किसान यूनियन, अंबाला), वरिष्ठ किसान नेता प्रदीप हुड्डा, ठाकुर सत्यभान चौहान (राष्ट्रीय अध्यक्ष, जय जवान जय किसान लोक शक्ति संगठन) और सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद संजय राणा शामिल रहे। सम्मान प्राप्त करने के बाद किसान मंच के उत्तराखंड प्रदेश उपाध्यक्ष कमल तिवारी ने आभार जताते हुए पहाड़ों में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वामी कमलानंद महाराज ने गाय, गंगा और गोबर के वैज्ञानिक संवर्धन से ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का मॉडल भी पेश किया। कार्यक्रम में विमल बत्रा, तरुण उप्पल, धर्मपाल सिंह, नीलम राजकुमार, डॉक्टर राजकुमार साहू, हर्ष ठाकुर, नरेश आनंद, मुकेश, अजय कुमार, बबीता, गीता देवी, मंजू चौहान, अनुज शर्मा, श्री कृष्ण राय, महेश गुप्ता, दत्ता आवरी, संजय छाबड़ी, अलीम, जाकिर अंसारी, कैप्टन नरेश कुमार, धर्मवीर सिंह, डॉक्टर सतीश चंद्र, प्रकाश बंधु, मिथिलेश कुमार, संतोष सिंह, डॉक्टर उदय चंद, जय पंडित, चौधरी सदाब, ओम प्रकाश, शिवकांत और रीता कुमारी सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए दर्जनों प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्ध नागरिक और जन-आंदोलनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।

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