मनोज ठाकुर
आज असम गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या माता मंदिर मे माँ भगवती के दर्शन का सौभागिया प्राप्त हुआ।
कामाख्ये कामसम्पन्ने कामेश्वरि हरप्रिये।
कामनां देहि मे नित्यं कामेश्वरि नमोऽस्तुते
अर्थ:
कामाख्ये – हे कामाख्या देवी!
कामसम्पन्ने – जो समस्त कामनाओं से परिपूर्ण हैं।
कामेश्वरि – जो काम (इच्छाओं) की अधिष्ठात्री देवी हैं।
हरप्रिये – भगवान शिव (हर) की प्रिय पत्नी।
कामनां देहि मे नित्यं – मेरी इच्छाएं प्रतिदिन पूरी करें।
कामेश्वरि नमोऽस्तु ते – हे कामेश्वरी देवी! आपको नमस्कार है।
यह प्राचीन मंदिर एक प्रमुख एवं सिद्ध शक्तिपीठ है। इसका सबसे बड़ा रहस्य यह है कि यहाँ माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक योनि के आकार की चट्टान है। मान्यता है कि यहां देवी हर साल रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं।
कामाख्या माता मंदिर मे अंबुबाची मेला (रक्तस्राव) हर साल जून के महीने में तीन दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।
माना जाता है कि इन दिनों में मंदिर के पास बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। लाल वस्त्र (अंबुवाची वस्त्र): मंदिर के कपाट बंद होने के बाद, तीन दिनों तक बहते हुए प्राकृतिक जल को लाल रंग का माना जाता है।
कपाट खुलने के बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में एक लाल कपड़ा दिया जाता है, जिसे बहुत पवित्र माना जाता है।
यह मंदिर देश-विदेश के तांत्रिकों, अघोरियों और साधकों के लिए सिद्धि प्राप्ति का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि यहां की गई तंत्र साधनाएं कभी खाली नहीं जातीं।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए थे। नीलांचल पहाड़ी पर माता सती की योनि गिरी थी, जिसके कारण इसे एक अत्यंत शक्तिशाली योनि पीठ माना जाता है।
आप सब को बहुत बहुत आशीर्वाद साधुवाद। माँ भगवती सदैव आप की रक्षा करे। हर हर महादेव।

