हरिद्वार में भाकियू चिंतन शिविर का तीसरा दिन, भूमि अधिग्रहण को बताया किसानों की सबसे बड़ी चुनौती…..
हरिद्वार
उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय चिंतन शिविर (किसान कुंभ) के तीसरे दिन राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने भूमि अधिग्रहण के बढ़ते मामलों को किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया।

उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में किसानों की कृषि भूमि का तेजी से अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे खेती और किसान दोनों संकट में हैं।राकेश टिकैत ने कहा, “किसान रात के अंधेरे में अपनी जमीन बेच सकता है, लेकिन फसल नहीं बेच सकता।” उन्होंने इसे देश की कृषि व्यवस्था और किसान हितों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
शिविर के दौरान भारतीय किसान यूनियन के शिक्षक प्रकोष्ठ द्वारा लिखित पुस्तक “कलम की फसल” का भी शिक्षकों की उपस्थिति में विमोचन किया गया।राष्ट्रीय चिंतन शिविर के तीनों सत्रों में संगठनात्मक, सामाजिक एवं कृषि संबंधी विषयों पर व्यापक समीक्षा की गई। साथ ही आगामी कार्यक्रमों और आंदोलनों की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में देशभर के विभिन्न राज्यों में किसान पंचायतों के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर पदाधिकारियों ने अपने सुझाव दिए। संगठन को मजबूत बनाने और किसानों की समस्याओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पंचायत अभियान चलाने पर सहमति बनी।कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा ने किया, जबकि अध्यक्षता बलराम सिंह लंबरदार ने की। शिविर में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं और पदाधिकारियों ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं एवं संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी साझा की।
बैठक में मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सैता, जम्मू-कश्मीर से विनोद कोतवाल, महाराष्ट्र से चंद्रशेखर पाटिल एवं रूपाली पाटिल सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं किसान नेता उपस्थित रहे।शिविर में भूमि अधिग्रहण, कृषि संकट, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा तथा किसानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष को और अधिक मजबूत बनाने तथा देशभर के किसानों को संगठित करने का आह्वान किया।

