सरकारी अस्पतालों में न तो फंड की कमी है और न ही संसाधन की। लेकिन अफसरशाही का रवैया ऐसा है कि प्रोस्टेट कैंसर, विटामिन, हार्मोनल जांच सहित 30 से अधिक आधुनिक टेस्ट सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रहे क्योंकि लखनऊ से मंजूरी नहीं मिली है।
यदि समय से इसकी मंजूरी मिल जाती तो सैकड़ों मरीजों को रोजाना बाहर से टेस्ट नहीं कराना पड़ता।
जिला संयुक्त अस्पताल के सीएमएस संजय गुप्ता ने बताया कि कई बार शासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द लंबित फाइल का निस्तारण करने की मांग की गई है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद मरीजों को सुविधा दी जा सकेगी।जिला संयुक्त अस्पताल की लैब को आधुनिक बनाया जा रहा है। करीब तीन महीने पहले हार्मोनल और प्रोस्टेट कैंसर टेस्ट की मशीन आई थी, मशीन चलाने से संबंधित फाइल शासन स्तर पर लंबित है। इसको चलाने के लिए शासन और निजी कंपनी में अग्रीमेंट होना है। ऐसा न होने से लोग बाहर से टेस्ट कराने और हजारों रूपये खर्च करने को मजबूर हैं। अस्पताल में आने वाले करीब 200 से अधिक मरीजों को बाहर का रुख करना पड़ता है। बाहर टेस्ट कराने में उन्हें अतिरिक्त रुपये खर्च करने पड़ रहे है।

