राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में जांच की चर्चा तेज है और व्यवस्थाओं की समीक्षा की तैयारी बताई जा रही है। कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग के बीच श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने पर जोर है।
राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन के आरोप का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर की व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार, मामले में जांच प्रक्रिया के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
जांच के दायरे में आए कुछ कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने अथवा उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में कार्यरत कई कर्मचारियों के दायित्वों में भी बदलाव किया जा सकता है, ताकि व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह तथा पारदर्शी बनाया जा सके।
सूत्र बताते हैं कि राम मंदिर ट्रस्ट पहले से ही मामले की आंतरिक जांच करा रहा है। सीसीटीवी फुटेज, लेखा अभिलेखों और संबंधित कर्मचारियों की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यवस्था में जल्द ही व्यापक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने, निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने तथा वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं। वहीं बुधवार को भी तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
बुधवार को कथित तौर पर गबन हुई डेढ़ करोड़ की राशि के बरामद होने की बात सामने आई। संदिग्धों से पूछताछ, उनके बैंक डिटेल आदि की जांच का क्रम जारी होने की चर्चा भी जोरों पर रही है। गबन के मामले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर ने कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। माना जा रहा है कि दान के पैसों की गिनती में लगे बैंक कर्मियों की भी जांच हो रही है। फिलहाल पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट ने चुप्पी साध रखी है।

