IAS ने जज को फोन कर दी धमकी, लंबित मुकदमे को लेकर डाला दबाव; HC लखनऊ ने कहा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार, आपराधिक अवमानना में चलेगा मुकदमा!
यूपी की महिला IAS अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वह देवीपाटन मंडल की कमिश्नर हैं।
गोंडा जिले में सीनियर डिवीजन की सिविल जज शबीना खान ने IAS अफसर के खिलाफ जिला जज को लेटर लिखा-कमिश्नर अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं।
एक लंबित मुकदमे को लेकर मुझ पर अनुचित दबाव बनाया, हाईकोर्ट में शिकायत करने की धमकी दी। मेरे संस्कारों पर सवाल उठाए। इससे मैं आहत हूं।
जज ने लेटर में महिला IAS अफसर से आई कॉल का पूरा ब्योरा दिया। अनुरोध किया कि संबंधित केस को किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर कर दिया जाए। उनके अनुरोध के बाद यह मुकदमा गोंडा सीनियर डिवीजन के सिविल जज एफटीसी नवीन की अदालत में ट्रांसफर किया गया है। 24 अगस्त यानी आज इस केस की सुनवाई है।
यह पूरा मामला ‘ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगरपालिका’ केस से जुड़ा है, जो करीब 30 साल से निचली अदालत में लंबित है। केस काफी पुराना होने से कोर्ट इसमें तेजी से सुनवाई कर रहा था। मामला निस्तारण के करीब पहुंच चुका है। आरोप है कि इसी केस के सिलसिले में कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल सिविल जज पर दबाव बना रही थीं।
• पहली कॉल (15 जुलाई)दोपहर 1:26 बजे- सिविल जज शबीना खान के फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। उस वक्त मोबाइल पर वीडियो देख रहे उनके 7 साल के बेटे ने कॉल उठाई। कॉल करने वाली महिला ने पूछा कि आपकी मम्मी कहां हैं? बच्चे ने बताया कि मम्मी वॉशरूम में हैं। इसके बाद महिला ने बच्चे से उसका नाम, उम्र और परिवार से जुड़ी बाते पूछीं। जब बच्चे ने उनका नाम पूछा, तो उन्होंने नाम बताए बिना कॉल काट दिया।
• दूसरी कॉलदोपहर 2:32 बजे- करीब एक घंटे बाद दोबारा कॉल आई। जज ने कॉल रिसीव कर परिचय पूछा, तो महिला ने कहा कि मैं कमिश्नर देवीपाटन मंडल दुर्गा शक्ति नागपाल बोल रही हूं। आप कब तक छुट्टी पर रहेंगी? जब जज ने उनकी छुट्टी के बारे में पूछने का कारण जानना चाहा, तो कमिश्नर ने कहा कि वह कोर्ट में लंबित मुकदमे के बारे में बात करना चाहती हैं। जज ने तुरंत फोन काट दिया, क्योंकि उन्हें यकीन नहीं हुआ कि कोई कमिश्नर सीधे फोन पर मुकदमे की बात करेगी। क्योंकि, सरकारी पक्ष के लिए पहले से सरकारी वकील नियुक्त होते हैं।
• स्टेनो की कॉलदोपहर 3:21 बजे- जज के पास स्टेनो आशुतोष के नंबर से फोन आया। उन्होंने बताया कि कमिश्नर मैडम के स्टेनो आपकी छुट्टी के बारे में जानकारी और आपका नंबर मांग रहे थे।
- तीसरी कॉलदोपहर 3:32 बजे- इसके बाद कमिश्नर और सिविल जज के बीच फिर बात हुई। शिकायती पत्र के अनुसार, कमिश्नर ने कहा- अच्छा हुआ कि आपने बात कर ली, वरना मैं आपकी शिकायत हाईकोर्ट करने वाली थी। आपको तमीज नहीं कि सीनियर आईएएस ऑफिसर से कैसे बात करते हैं? मैंने 27 साल की सर्विस में ऐसा ऑफिसर नहीं देखा। आपके व्यवहार से लगता है कि आप ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं भी या नहीं।
सिविल जज ने लेटर में लिखा कि जब उन्होंने कमिश्नर को अपनी बात समझाने की कोशिश की, तो उन्होंने सुनने से इनकार कर दिया। कमिश्नर ने कहा कि आपने मुझे बोलने का मौका ही नहीं दिया। आप मेरा फोन रिसीव नहीं कर रही हैं। मुझे तो यह लग रहा है कि कैसे संस्कार हैं आपके?
इस पर सिविल जज शबीना खान ने जवाब दिया कि वह छुट्टी की अवधि या समय बताने के लिए बाध्य नहीं हैं। न ही किसी फेक कॉल या अनजान नंबर पर केस डिस्कस कर सकती हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार का पक्ष रखने के लिए कोर्ट में सरकारी वकील मौजूद रहते हैं। इसके बाद भी कमिश्नर ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सीनियर आईएएस होने का हवाला दिया। कहा- मैं केस हाईकोर्ट में ट्रांसफर करवा लूंगी। जज ने इस पर सहमति जताई कि वो केस बिल्कुल ट्रांसफर करवा सकती हैं।

