देश में एयरपोर्ट निजीकरण का अगला चरण: 11 एयरपोर्ट प्राइवेट हाथों में जाएंगे, मोनोपॉली रोकने को लिमिट तय


देश में एयरपोर्ट निजीकरण का अगला चरण: 11 एयरपोर्ट प्राइवेट हाथों में जाएंगे, मोनोपॉली रोकने को लिमिट तय

नई दिल्ली। देश में हवाई अड्डों के निजीकरण का अगला चरण शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के 11 एयरपोर्ट्स को प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी में है।

इस बार प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार किसी एक कंपनी के पास बहुत ज्यादा ताकत या एकाधिकार (मोनोपॉली) जाने से रोकना चाहती है, इसलिए नीलामी में एक बिडर द्वारा जीते जाने वाले एयरपोर्ट बंडल्स की संख्या पर लिमिट तय की जाएगी।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) ने 4 अगस्त को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इसे पास किया।

कौन से 11 एयरपोर्ट? 5 बंडल में होंगे
सरकार ने 11 एयरपोर्ट्स को 5 बंडल/क्लस्टर में बांटा है। हर बंडल में 1 बड़ा एयरपोर्ट और 1-2 छोटे एयरपोर्ट रखे गए हैं ताकि छोटे एयरपोर्ट का भी विकास हो सके।

  1. अमृतसर + कांगड़ा-गग्गल
  2. वाराणसी + गया + कुशीनगर
  3. भुवनेश्वर + हुबली
  4. रायपुर + औरंगाबाद
  5. तिरुचिरापल्ली + तिरुपति

इन एयरपोर्ट्स को PPP मॉडल पर 50 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा। प्राइवेट कंपनियां किराया, पार्किंग और अन्य शुल्क से कमाई करेंगी और करीब 8,622 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।

2019 में पिछले राउंड में सभी 6 एयरपोर्ट अडानी ग्रुप को मिले थे, जिसके बाद मोनोपॉली को लेकर सवाल उठे थे, इसलिए इस बार बंडल लिमिट का नियम लाया गया है।

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