कैबिनेट ने मंगलवार को विधानसभा में ‘गोवा गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध विधेयक, 2026’ पेश करने को मंजूरी दी।
इसमें जबरन, दबाव, अनुचित प्रभाव, लालच, धोखाधड़ी या शादी के ज़रिए किए गए कथित धर्म परिवर्तन के लिए कड़ी सजा का प्रस्ताव है।
विधेयक में उम्रकैद तक की सजा, कम से कम 50,000 रुपये का जुर्माना और पीड़ितों को 5 लाख रुपये तक का मुआवज़ा देने का प्रावधान है। प्रस्तावित कानून के तहत, अगर कोई शादी सिर्फ गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के मकसद से या शादी के ज़रिए धर्म परिवर्तन के लिए की गई पाई जाती है, तो उसे अमान्य घोषित किया जा सकता है।
गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन में शामिल दोषियों को कम से कम तीन साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इनमें पुजारी, कर्मकांडी, मौलवी या मुल्ला जैसे धार्मिक व्यक्ति भी शामिल हैं। अगर धर्म परिवर्तन कराने वाला व्यक्ति नाबालिग, दिव्यांग या मानसिक रूप से बीमार, महिला, या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है, तो सजा 5 से 14 साल की कठोर कैद और कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना हो सकती ह

