उत्तर प्रदेश का नोएडा में श्रमिकों का आंदोलन पूरे जोरों पर है। कंपनी के सैंकड़ों कर्मचारी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वेतन वृद्धि के मामले को जोर-शोर से उठाया जा रहा है।
न्यूनतम वेतन न लागू किए जाने के मसले को भी इसके साथ उठाए जाने लगा है। दरअसल, कंपनियों में कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। कंपनी कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें हर महीने 12,000 रुपये वेतन मिलता है। वे 20,000 रुपये वेतन की मांग करते दिख रहे हैं।
इन सबके बीच सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आ चुका है, लेकिन अब तक प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर इस मसले पर कुछ भी कहते नहीं दिखे हैं। ऐसे में श्रम मंत्री को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
नोएडा में कर्मचारियों के प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारी मामूली वेतन वृद्धि के बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, विवाद तब और गहरा गया, जब शनिवार को प्रदर्शनकारी कर्मचारी और पुलिस आमने-सामने आ गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इसी दौरान एक महिला कर्मी को दो गोली लगी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामला सामने आया तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में किसी भी प्रकार से कर्मचारियों के हकों के साथ खिलवाड़ न होने देने की बात करते दिखे।
हालांकि, अब इस पूरे विवाद में श्रम मंत्री अनिल राजभर की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
उत्तर प्रदेश श्रम मंत्री का ध्यान ना देना बताता है कि वह अपने विभाग के प्रति लापरवाह करते हैं मात्र वीआईपी कल्चर के लिए मंत्री बने हैं धरातल पर कोई कानून का दिख नहीं रहा है

