भारत माता मंदिर का स्थापना दिवस संतों और श्रद्धालु भक्तों के सानिध्य में मनाया गया।

मनोज ठाकुर

भारत माता मंदिर का स्थापना दिवस संतों और श्रद्धालु भक्तों के सानिध्य में मनाया गया।

स्थापना दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य भगवान शंकर के अवतार थे।

उन्होंने कहा कि गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं। राष्ट्र और भक्तों के कल्याण के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने 1983 में भारत माता मंदिर की स्थापना की थी।

गुरूदेव का एक ही संदेश था कि गरीब असहाय लोगों की सेवा करने से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है।

महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज भी गुरू के बताए मार्ग पर चलकर लाखों भक्तों का कल्याण कर रहे हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा कि भारत माता मंदिर ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी की राष्ट्र के प्रति अगाध श्रद्धा और भक्ति का जीवंत प्रमाण है। सभी को उनके विचारों और कृतित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए।

भारत माता मंदिर के सचिव आईडी शास्त्री ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी विश्वात्मानंद गिरी सहित कई संत महंत, ट्रस्टी और श्रद्धालु मौजूद रहे

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