पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने मोर पंख की बिक्री और इसके दुरुपयोग पर बड़ा बयान दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने दावा किया है कि 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में बने वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत दिगंबर जैन साधुओं के आग्रह पर मोर पंख को बिक्री की परमिशन दी गई थी।
उनका कहना है कि इसी छूट के बाद मोर पंख का बड़ा कारोबार खड़ा हो गया और अब अधिकांश पंख मोरों को मारकर हासिल किए जाते हैं।
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने कहा कि दिगंबर जैन साधु अपनी कमर में मोर पंख से बनी ‘पिच्छी’ रखते हैं।
उन्होंने बताया कि उस समय साधुओं ने सरकार से अनुरोध किया था कि मोर पंख पर प्रतिबंध न लगाया जाए, जिसे इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया।
इसके बाद मोर पंख भारत में कानूनी रूप से बेचे जाने वाले एकमात्र पक्षी के पंख बन गए।

