उत्तराखंड के एक अधिकारी ऐसे भी है जिनको भारत सरकार के द्वारा भारतीय स्वतंत्रता ईमानदारी के सम्मान से सम्मानित किया जाएगा¡? सम्मान की खबर के बीच उठे सवाल

सम्मान की खबर के बीच उठे सवाल: क्या उत्तराखंड में अवैध खनन पर पर्दा डाला जा रहा है?

उत्तराखंड में खनन विभाग से जुड़ी हालिया खबर ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर प्रदेश सरकार को “India’s Honest Independence Honor” जैसे प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुने जाने की घोषणा की गई है, वहीं दूसरी ओर राज्य में अवैध खनन को लेकर कई आरोप और शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

खनन विभाग के निदेशक श्री राजपाल लेघा के नेतृत्व में विभाग को पारदर्शी प्रशासन और बेहतर राजस्व प्रबंधन के लिए सराहा जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले चार वर्षों में खनन से प्राप्त राजस्व ने राज्य के बजट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही जा रही है।

लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है।

प्रदेश के कई क्षेत्रों से किसानों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए हैं कि खनन माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर उनकी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया गया है। कई किसानों का कहना है कि उनके खेतों को इस तरह उजाड़ दिया गया कि वे दोबारा खेती करने लायक भी नहीं बचे। इन मामलों में प्रशासन से शिकायतें किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई न होने की बात भी सामने आई है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खनन विभाग की कार्यप्रणाली और उसके नेतृत्व को लेकर उठ रहा है।

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राज्य में अवैध खनन की इतनी शिकायतें हैं, तो विभाग की जवाबदेही तय होना भी उतना ही जरूरी है। कई लोगों ने यह तक सवाल उठाया है कि इन अधिकारियों की योग्यता देख लेना चाहिए, क्योंकि आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि यह अधिकारी डायरेक्टर बनने लायक भी नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद वे इस पद पर बने हुए हैं।

28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार को सम्मानित किया जाना प्रस्तावित है। लेकिन इसके साथ ही यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि राज्य में अवैध खनन के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खनन से राज्य को इतना बड़ा राजस्व प्राप्त हो रहा है, तो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका संचालन पूरी पारदर्शिता और कानून के दायरे में हो।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या उत्तराखंड में अवैध खनन की शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच होगी, या फिर यह मुद्दा भी समय के साथ दब जाएगा?

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