दिनांक: 03 नवम्बर, 2026
कृषि भूमि को आवासीय एवं ग्रुप हाउसिंग में परिवर्तित करने के HRDA के प्रस्तावों पर रोक बरकरार; माननीय उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी – प्रस्ताव माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की पूर्ण अवहेलना में पारित किया गया प्रतीत होता है
माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड, नैनीताल ने जनहित याचिका संख्या 116/2023 में दिनांक 30.10.2026 को पारित महत्वपूर्ण आदेश में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की दिनांक 05.11.2024 को आयोजित 83वीं बोर्ड बैठक में पारित कृषि भूमि को आवासीय एवं ग्रुप हाउसिंग उपयोग में परिवर्तित करने संबंधी प्रस्तावों पर पूर्व में लगाई गई रोक को बरकरार रखा है।
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस तथ्य पर गंभीर संज्ञान लिया कि जनहित याचिका संख्या 119/2013 में दिनांक 19.06.2018 को पारित आदेश के पैरा 14 (v) के अंतर्गत स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि उत्तराखण्ड राज्य में कृषि भूमि की कमी को देखते हुए राजस्व अभिलेखों में कृषि भूमि के रूप में दर्ज भूमि को ग्रुप हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के लिए परिवर्तित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, स्वयं के आवास हेतु मकान बनाने वाले किसानों को कानून के प्रावधानों के अनुसार छूट दी गई थी।
राज्य द्वारा उक्त आदेश को चुनौती दिए जाने के उपरांत माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त मामले में राज्य सरकार को उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर उक्त निर्देश के संबंध में स्पष्टीकरण प्राप्त करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी। इसके बावजूद न तो राज्य सरकार और न ही किसी अन्य पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय से कोई स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। इसके विपरीत, HRDA की बोर्ड बैठक दिनांक 05.11.2024 में जिला शासकीय अधिवक्ता व पैनल अधिवक्ता से विधिक राय प्राप्त कर कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव पारित कर दिए गए।
दिनांक 30.10.2026 के आदेश के पैरा 8 एवं पैरा 10 में माननीय उच्च न्यायालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार अथवा किसी भी व्यक्ति द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय से प्राप्त स्वतंत्रता के बावजूद उच्च न्यायालय से कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया। ऐसी स्थिति में विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि उपयोग परिवर्तन के उद्देश्य से विधिक राय लेकर प्रस्ताव पारित करने का कोई औचित्य नहीं था। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से अवलोकन किया कि विकास प्राधिकरण द्वारा पारित उक्त प्रस्ताव माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की पूर्ण अवहेलना में पारित किया गया प्रतीत होता है।
माननीय न्यायालय ने इस बात पर भी संतुष्टि प्राप्त करने की आवश्यकता व्यक्त की है कि विकास प्राधिकरण ने किन परिस्थितियों में और किस आधार पर ऐसा प्रस्ताव पारित किया, जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के प्रतिकूल प्रतीत होता है।
इसी क्रम में माननीय न्यायालय ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश पारित किए हैं जिसमें मुख्यतः HRDA को दिनांक 05.11.2024 के प्रस्ताव को तैयार करने एवं पारित करने की संपूर्ण मूल पत्रावली, समस्त आंतरिक टिप्पणियां, पत्राचार एवं उस पर ली गई विधिक राय प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं व उक्त संपूर्ण अभिलेख अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि HRDA की 83वीं बोर्ड बैठक के मद संख्या 83(09) से 83(13) तक पांच प्रस्तावों के अंतर्गत ग्राम रोहालकी किशनपुर, नूरपुर पंजनहेड़ी, सलेमपुर महदूद-1 एवं जियापोता स्थित कुल 38,705 वर्गमीटर कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में परिवर्तित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
इस प्रकार, माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से उक्त पांचों प्रस्तावों के आधार पर कृषि भूमि को आवासीय एवं ग्रुप हाउसिंग उपयोग में परिवर्तित करने की कार्यवाही पर रोक प्रभावी बनी हुई है। संबंधित प्राधिकरण को न्यायालय के आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
प्रकरण की अगली सुनवाई दिनांक 04.12.2026 को नियत की गई है।

