हरिद्वार जिला महिला चिकित्सालय में चमत्कार – मौत के मुंह से लौटी जच्चा-बच्चा, परिवार ने कहा – “फ्री इलाज ने बचाई जान”

हरिद्वार जिला महिला चिकित्सालय में चमत्कार – मौत के मुंह से लौटी जच्चा-बच्चा, परिवार ने कहा – “फ्री इलाज ने बचाई जान”

NPCL द्वारा संचालित जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार में बड़ी सफलता – संचालक डॉ. मनोज मिश्रा के नेतृत्व में मिल रही बेहतर सुविधा

हरिद्वार। NPCL द्वारा संचालित जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार ने एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की है। संचालक डॉ. मनोज मिश्रा की कड़ी मेहनत और बेहतर प्रबंधन से हरिद्वार के निवासियों को अब 24×7 बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।

ताजा मामला — डॉ. अनामिका शर्मा और डॉ. आस्था शर्मा ने मिलकर 36 हफ्ते की गर्भवती, एक्लेम्पसिया से पीड़ित महिला का सफल ऑपरेशन किया। 2 दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। परिवार ने बताया पूरा इलाज निःशुल्क ह

हरिद्वार जिला महिला चिकित्सालय में चमत्कार – मौत के मुंह से लौटी जच्चा-बच्चा, परिवार ने कहा – “फ्री इलाज ने बचाई जान”

हरिद्वार। जिला महिला चिकित्सालय, हरिद्वार में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने मिसाल कायम की है। 36 हफ्ते की गर्भवती, 21 वर्षीय प्रियंका को जब एक्लेम्पसिया (गर्भावस्था में दौरे और दिल बढ़ने की गंभीर बीमारी) ने घेरा, तो परिजनों को लगा अब सब खत्म।

पति ओमकार ने बताया, “पहले रुड़की ब्लॉक से हरिद्वार रेफर किया। यहाँ आते ही हालत बहुत खराब हो गई, दौरे पड़ने लगे। डॉक्टरों ने एक मिनट भी नहीं गंवाया, तुरंत ऑपरेशन किया। मेरी पत्नी 2 दिन वेंटिलेटर पर रही, आज मेरी पत्नी और बच्चा दोनों बिल्कुल स्वस्थ हैं।”

अस्पताल की सबसे बड़ी बात –
ओमकार ने खुद कैमरे पर कहा — “हमारा पूरा इलाज 100% फ्री हुआ। एक रुपया नहीं लगा। अगर हम प्राइवेट में जाते तो लाखों लगते और जान भी खतरे में रहती। हम चाहते हैं हर गरीब परिवार यहाँ आकर इलाज कराए।”

मरीज अब खतरे से बाहर है और 1-2 दिन में डिस्चार्ज हो जाएगी। डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई और ICU टीम की मेहनत से माँ और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।

एक्लेम्पसिया क्या है? डॉक्टरों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में हाई BP के कारण दौरे पड़ना बेहद खतरनाक स्थिति है, जिसमें तुरंत डिलीवरी ही एकमात्र इलाज है। जिला अस्पताल ने इस हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी को सफलतापूर्वक मैनेज कर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पताल भी किसी प्राइवेट से कम नहीं।

मरीज के पति ने कहा — “प्राइवेट में लाखों लगते, यहाँ जान भी बची और पैसा भी।”

हरिद्वार वासियों के लिए भरोसेमंद बना NPCL अस्पताल।

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