फर्जी SC/ST एक्ट के मुकदमे में प्रताड़ना और दुरुपयोग को लेकर तिवारी जी की आपबीती।

फर्जी SC/ST एक्ट के मुकदमे में प्रताड़ना और दुरुपयोग को लेकर तिवारी जी की आपबीती।

Ganga News 24 पर इस तरह की खबर चलाते समय संतुलित और कानूनी तथ्यों के साथ चलाना ज़रूरी है, ताकि किसी समुदाय के खिलाफ नफरत न फैले।

कानूनी स्थिति क्या है:

1. कानून का उद्देश्य: SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 अनुसूचित जाति-जनजाति के खिलाफ अत्याचार रोकने के लिए बना है। ये बहुत सख्त कानून है।

2. अगर मुकदमा फर्जी हो तो क्या करें – कानूनी रास्ते:

  • अग्रिम जमानत: 2018 के संशोधन के बाद आम तौर पर अग्रिम जमानत नहीं मिलती, लेकिन अगर प्रथम दृष्टया मामला झूठा लगे तो हाईकोर्ट राहत दे सकता है – सुप्रीम कोर्ट का 2020 का पृथु राज चौहान फैसला
  • FIR रद्द करवाना: हाईकोर्ट में धारा 482 CrPC / 528 BNSS के तहत याचिका
  • जांच में सहयोग: DSP रैंक के अधिकारी द्वारा जांच अनिवार्य है, आप अपने सबूत, CCTV, गवाह पेश कर सकते हैं
  • फर्जी केस करने वाले पर कार्रवाई: अगर केस झूठा साबित हो तो IPC 182, 211 और अब BNS 217, 248 के तहत झूठी शिकायत पर मुकदमा

3. दुरुपयोग पर कोर्ट क्या कह चुका है:
सुप्रीम कोर्ट ने डॉ सुभाष काशीनाथ महाजन (2018) मामले में कहा था कि झूठे मामलों को रोकने के लिए प्रारंभिक जांच जरूरी है। हालांकि संसद ने बाद में कानून को और सख्त कर दिया।

Ganga News 24 के लिए सुझाव:
अगर तिवारी जी का इंटरव्यू चलाना है तो उनकी जुबानी उनकी परेशानी दिखाएं, लेकिन कैप्शन में ये लिखें कि “पीड़ित ने फर्जी मुकदमे का आरोप लगाया, मामले की जांच जारी है” – सीधे पूरे एक्ट को वापस लेने की मांग को व्यक्तिगत राय के तौर पर दिखाएं, चैनल की राय नहीं।

आप चाहें तो मैं इस विषय पर “फर्जी SC/ST केस में क्या करें – कानूनी अधिकार” वाला जानकारीपूर्ण पोस्टर बना दूं, जिससे लोगों को सही कानूनी रास्ता पता चले?

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