📱 बच्चों का बचपन मोबाइल में कैद – निजी स्कूलों की ऑनलाइन होमवर्क नीति पर उठे सवाल
हरिद्वार, 14 सितंबर 2026
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक चिंताजनक पहलू सामने आ रहा है। निजी स्कूलों द्वारा बच्चों का हर काम मोबाइल पर भेजने की परंपरा ने अभिभावकों और बच्चों दोनों को परेशानी में डाल दिया है।

अभिभावकों की मजबूरी बनी बच्चों की लत
जब स्कूल की तरफ से पढ़ाई का काम मोबाइल पर आता है, तो माता-पिता को मजबूरी में अपने छोटे बच्चों के हाथ में फोन देना पड़ता है। यही मजबूरी धीरे-धीरे बच्चों में मोबाइल की आदत बन जाती है। पढ़ाई के नाम पर मिला मोबाइल कब मनोरंजन, रील्स और गेमिंग का साधन बन जाता है, पता ही नहीं चलता।
स्थानीय समाजसेवी कुलदीप शर्मा (9760008162) ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि स्कूलों का काम फोन पर आना बिल्कुल बंद होना चाहिए। जब स्कूल हजारों रुपये फीस लेते हैं और शिक्षक पूरा वेतन लेते हैं, तो फिर काम स्कूल में क्यों नहीं करवाया जाता?
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
बच्चों की उम्र सीखने, खेलने और रचनात्मक गतिविधियों की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरी होमवर्क कॉपी-किताब के माध्यम से दिया जाना चाहिए। मोबाइल का उपयोग जरूरत के अनुसार और माता-पिता की निगरानी में ही होना चाहिए।
बच्चों को मोबाइल से नहीं, किताबों और अच्छे संस्कारों से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। स्कूल और अभिभावक मिलकर ही बच्चों को डिजिटल लत से बचा सकते हैं। आज की छोटी सी सावधानी ही बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की बड़ी नींव बन सकती है।
GANGA NEWS 24 की अपील – निजी स्कूल प्रबंधन इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और ऑफलाइन शिक्षा को बढ़ावा दें। हरिद्वार में जल्दी एक बड़ा अभियान चलाई जाएगा आप सभी से निवेदन है कि अभियान में जुड़कर बच्चों के भविष्य को बचाइए.

