‘टिकट कटे तो भी घर नहीं बैठना है, पार्टी को जिताना है यह मैसेज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने यूपी दौरे में दिया।
नितिन नवीन ने संकेत दिया कि आने वाले चुनाव में केवल ‘जिताऊ’ चेहरों को ही मौका मिलेगा। खराब छवि वाले और कार्यकर्ताओं से दूर रहने वाले करीब 40% विधायकों का टिकट कट सकता है।
4-5 जुलाई को 36 घंटे राष्ट्रीय अध्यक्ष लखनऊ में रहे। सरकार, संगठन और संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठकर नब्ज टटोली। उनका पूरा फोकस ऐसी 240 सीटों पर रहा, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बेहद खराब था। उनकी सीटों पर सांसदी लड़ने वाले कैंडिडेट पिछड़ गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष यहां जिताऊ कैंडिडेट चाहते हैं।
लोकसभा चुनाव 2024: BJP इन विधायकों की विधानसभा में बड़े मार्जिन से पिछड़ी
• रायबरेली — अदिति सिंह — 1.03 लाख वोट से पिछड़ी
• सहारनपुर नगर — राजीव गुंबर — 45 हजार वोट से पिछड़े
• नकुड़ (सहारनपुर) — मुकेश चौधरी — 34 हजार वोट से पिछड़े
• नहटौर (बिजनौर) — ओमकुमार — 31 हजार वोट से पिछड़े
• रामपुर — आकाश सक्सेना — 38 हजार वोट से पिछड़े
• बिसवां (सीतापुर) — निर्मल वर्मा — 43 हजार वोट से पिछड़े
• सिधौली (सीतापुर) — मनीष रावत — 56 हजार वोट से पिछड़े
• मोहनलालगंज (लखनऊ) — अमरेश कुमार — 32 हजार वोट से पिछड़े
• सलोन (रायबरेली) — अशोक कुमार — 42 हजार वोट से पिछड़े
• छिबरामऊ कन्नौज — अर्चना पाण्डेय — 52 हजार वोट से पिछड़ी
• तिर्वा (कन्नौज) — कैलाश राजपूत — 35 हजार वोट से पिछड़े
• बदायूं — महेश चन्द्र गुप्ता — 40 हजार वोट से पिछड़े
• अकबरपुर-रनिया (कानपुर देहात) — प्रतिभा शुक्ला — 29 हजार वोट से पिछड़ी
• भोगनीपुर (कानपुर देहात) — राकेश सचान — 31 हजार वोट से पिछड़े
• कुर्सी (बाराबंकी) — साकेन्द्र प्रताप वर्मा — 47 हजार वोट से पिछड़े
• बीकापुर (अयोध्या) — अमित सिंह चौहान — 30 हजार वोट से पिछड़े
• खलीलाबाद (संतकबीरनगर) — अंकुर तिवारी — 52 हजार वोट से पिछड़े
क्या सिर्फ परफॉर्मेंस ही टिकट कटने का आधार होगा? इसका जवाब भाजपा संगठन के एक पदाधिकारी देते हैं- केंद्रीय नेतृत्व यूपी में सर्वे करवा चुका है। इनमें कई विधायकों के हारने का अनुमान दिया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 6 कैटेगरी तय की हैं। इन्हीं के आधार पर विधायक के दावेदार तय होंगे-
1 जहां सांसद और विधायकों के बीच टकराव है। सांसद के असर से विधायक अपनी सीट गंवा सकते हैं।
2 ऐसी सीटें, जहां के विधायक से कार्यकर्ता नाराज हैं।
3 वो विधायक जो क्षेत्र में सक्रिय नहीं हैं। पार्टी के कामों में भी दिलचस्पी नहीं ले रहे।
4 ऐसे विधायक, जिसकी उम्र 70 साल से ज्यादा हो गई है।
5 वो विधायक, जो सरकार और संगठन के खिलाफ अक्सर बयान देते रहे हों।
6 लोकसभा चुनाव में जहां बीजेपी विधायकों के क्षेत्र में पार्टी बुरी तरह हारी थी।
सिर्फ इतना ही नहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में बहुत कम मार्जिन से सीट बचाने में कामयाब रहे विधायकों पर भी भाजपा विचार कर रही है। कई विधायक तो सिर्फ 200-300 वोट से अपनी सीट बचा सके थे।
• 2022 विधानसभा चुनाव – भाजपा और उसके सहयोगी दल ‘अपना दल’ के पास कुल 318 विधायक थे। 104 विधायकों के टिकट काट दिए गए। यानी करीब 32% विधायकों के टिकट काटे थे।
• 2017 विधानसभा चुनाव – भाजपा ने हारी हुई 85 सीटों में 69 पर प्रत्याशी के चेहरे बदले थे। ये करीब 81% है।

