उत्तर प्रदेश के चंदौली रेलवे जंक्शन के वीआईपी गेट के समीप जीटी रोड स्थित लगभग दो सौ वर्ष पुराने मां काली मंदिर को शुक्रवार देर रात सड़क चौड़ीकरण कार्य के तहत हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
जेसीबी की आवाज सुनते ही बड़ी संख्या में नगरवासी मौके पर पहुंचे।
एक ओर लोग शहर के विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था की आवश्यकता पर सहमति जता रहे थे, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने आस्था स्थल के हटने से अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम दिखीं। आधी रात के साथ नगर की एक ऐतिहासिक पहचान भी अतीत का हिस्सा बन गई।
कार्रवाई से पहले प्रशासन ने मंदिर की सभी प्रतिमाओं को वैदिक रीति-रिवाज के साथ सुभाष पार्क के समीप नवनिर्मित मां काली मंदिर में स्थापित करा दिया था। इसके बाद सड़क निर्माण कंपनी ने पुराने ढांचे को हटाने का कार्य आरंभ किया। ब्रिटिश शासनकाल से जीटी रोड के मध्य स्थित यह मंदिर नगरवासियों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क निर्माण के समय भी मंदिर अपने स्थान पर सुरक्षित रहा था। वर्षों से यहां नियमित पूजा-अर्चना, हवन, भंडारा, कथा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहे हैं। दूर-दराज से श्रद्धालु मां काली के दर्शन के लिए पहुंचते थे और अपनी मनोकामनाएं लेकर माथा टेकते थे। मंदिर की ख्याति नगर से बाहर तक रही है।
फिल्म अभिनेता एवं सांसद मनोज तिवारी सहित कई जनप्रतिनिधि और कलाकार यहां दर्शन कर चुके हैं। श्रद्धालुओं के बीच मां काली की कृपा और चमत्कारों से जुड़े अनेक प्रसंग आज भी प्रचलित हैं। पुराने मंदिर का स्वरूप भले ही अब समाप्त हो गया हो, लेकिन श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां काली की आराधना नए मंदिर में उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ निरंतर जारी रहेगी।

