यूपी में वरिष्ठ मंत्रियों की होगी अग्निपरीक्षा, विधान परिषद सदस्य भी लड़ेंगे चुनाव; BJP की इस रणनीति से नेता जी हुए चिंतित!
दरअसल, उत्तर प्रदेश में ऐसे मंत्री जो विधान परिषद के सदस्य हैं, उन्हें इस बार विधानसभा चुनाव की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। मजबूत चुनावी तैयारी का संदेश देने और हर हाल में जीत की हैट्रिक सुनिश्चित करने के लिए पार्टी की योजना प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी चुनाव मैदान में उतारने की है।
कुछ वरिष्ठ नेताओं को विशेष कारणों और जरूरतों के मद्देनजर चुनाव लड़ने से छूट दी जा सकती है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट मंत्री में भाजपा के पांच नेता हैं जो विधान परिषद के सदस्य हैं। इनमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र चौधरी, एके शर्मा और दारा सिंह चौहान को चुनाव लड़ना होगा।
मौर्य पिछले बार सिराथू से चुनाव लड़े थे। हालांकि हारने के बाद इन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया और विधान परिषद लाया गया। इन सभी पांच कैबिनेट मंत्रियों को चुनाव लड़ाने पर अंतिम सहमति बन चुकी है। इसके अलावा स्वतंत्र प्रभार वाले छह और तीन राज्य मंत्री हैं, जो विधान परिषद के सदस्य हैं। इनमें से भी ज्यादातर को इस बार विधानसभा चुनाव लड़ना होगा।
पार्टी की रणनीति हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को विधानसभा चुनाव लड़ाने की है। नेतृत्व का मानना है कि ओबीसी समुदाय में यादव बिरादरी के बाद सबसे मजबूत कुर्मी बिरादरी के चौधरी के मैदान में उतरने से पिछड़ा वर्ग में मजबूत संदेश जाएगा। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय होना बाकी है। अगर ऐसा हुआ तो सात बार लोकसभा चुनाव जीत चुके प्रदेश अध्यक्ष का यह पहला विधानसभा चुनाव होगा।
बीते लोकसभा चुनाव में ओबीसी वोट बैंक के छिटकने के कारण सपा से लगे झटके के बाद पार्टी नेतृत्व सतर्क है। राज्य में 2019 के मुकाबले राजग के मत प्रतिशत में नौ फीसदी की ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी। उसके उलट सपा गठबंधन के मत प्रतिशत में 19 फीसदी का तेज उछाल आया था। इसके कारण भाजपा की सीटों की संख्या घट कर आधी रह गई थी। यही कारण है कि भाजपा अपने कद्दावर नेताओं को उतार कर इसकी भरपाई करना चाहती है

