उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले से पुलिस के द्वारा कोर्ट में एक ऐसा बयान दिया जिसको देखकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाओगे

लखीमपुर में एक करोड़ के सोने के जेवर बारिश में खराब हो गए। बाकी बचे जेवरों को बंदर उठा ले गए। यह तर्क सदर कोतवाली की पुलिस ने कोर्ट में दिया।

मामला 19 साल पुराना दहेज हत्या का है। कोर्ट ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे बरी किया था। पुलिस को जब्त जेवरों को ससुराल वालों को सौंपने के निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जेवरों से भीगी पोटली को मालखाने की छत पर सुखाने के लिए रखा था। ज्यादातर जेवर भीगने से खराब होकर गल गए। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा- लग रहा जेवरों को पुलिसकर्मियों ने अपने हित में प्रयोग किया। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और क्षतिपूर्ति कराने निर्देश दिए थे। एक साल बाद भी ऐसा न होने पर पीड़ित परिवार हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है।

2007 में शहर के मोहल्ला कपूरथला निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी रानी अग्रवाल उर्फ जूली ने दिवाली की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमॉर्टम के दौरान उनके शरीर से नाक की सोने की कील, गले की चेन व लॉकेट, सोने की अंगूठी और 10 सोने की चूड़ियां उतारकर पुलिस के सुपुर्द की गई थीं। इन्हें सदर कोतवाली के मालखाने में जमा कराया गया था।

मौत के बाद मायके पक्ष की तहरीर पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और मुदित अग्रवाल समेत अन्य आरोपियों को जेल भेजा गया। 28 फरवरी 2024 को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपी बरी कर दिए गए। मुकदमे के निस्तारण के बाद मुदित अग्रवाल ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर जेवर अपने पक्ष में रिलीज करने की मांग की। इस पर पुलिस की ओर से दाखिल रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया।

पुलिस ने कोर्ट को बताया- 7 सितंबर, 2013 तक की मालखाने की पोटलियों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था। कुछ पोटलियों को बंदर लेकर भाह गए। तत्कालीन सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने इस स्पष्टीकरण को सिरे से खारिज कर दिया। टिप्पणी में कहा- सोने के जेवर बारिश में नष्ट नहीं हो सकते। मालखाने जैसी संवेदनशील जगह के कीमती सामान को खुले में बिना निगरानी के कैसे रखा गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *