राम मंदिर में चंदे की चोरी के आरोप लगने के एक सप्ताह बाद भी मंदिर ट्रस्ट चुप्पी साधे है।
ट्रस्ट के पदाधिकारी फोन पर भी कुछ बोलने से बच रहे हैं। इस बीच पता चला है कि आरएसएस और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच जांच और जवाबदेही के ड्राफ्ट पर मंथन चल रहा है।
ऑडिट जल्द से जल्द कराने की तैयारी चल रही है ताकि रिपोर्ट के आधार पर सपा प्रमुख के आरोप का जवाब दिया जा सके। इस बीच जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पूरे मामले में कहा है कि जांच की जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट की है। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
शाही ने कहा कि यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आंतरिक मामला है। ट्रस्ट पहले ही जांच शुरू करवा चुका है। भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट अपनी नियमावली के मुताबिक जरूरी कदम उठाएगा। कहा कि ट्रस्ट मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और किसी भी श्रद्धालु की आस्था से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। अगर कहीं कोई कमी या अनियमितता मिलती है तो उसकी विस्तृत जांच होगी। यह भी दोहराया कि ट्रस्ट एक स्वायत्त संस्था है जो भारतीय ट्रस्ट कानून के तहत पंजीकृत है। इसी वजह से सरकार फिलहाल सीधे हस्तक्षेप नहीं कर रही है। यदि भविष्य में सरकार से कोई सहयोग या कार्रवाई की मांग की जाएगी तो उस पर प्रदेश सरकार विचार करेगी।

