राष्ट्रीय राजधानी की दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बैंक खाता किसी व्यक्ति के आर्थिक अस्तित्व का मूल आधार है और खाताधारक के खिलाफ कोई आरोप, प्राथमिकी (एफआईआर) या न्यायिक आदेश न होने पर उस खाते पर रोक नहीं लगाई जा सकती है.
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने गुजरात साइबर क्राइम पुलिस की शिकायत पर एक निजी बैंक में एक व्यक्ति के खाते पर रोक लगाने (फ्रीज) से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. यह रोक नवंबर, 2024 में लगाई गई थी.

