तालाब परमिशन के नाम पर अवैध खनन जोरों पर अभी हाल ही में बंजारे वाला क्षेत्र में अवैध खनन के कारण ही 12 साल के एक बच्चे को मगरमच्छ के द्वारा मार दिया गया था उसे घर पर क्या बीता होगा जिसका अकेला ही बेटा था परंतु खनन माफिया इस और ध्यान नहीं देते उनको तो सिर्फ अवैध खनन करके पैसे कमाने से मतलब है अधिकारियों को भी पैसे से ही मतलब है सरकार मोहन है जिस घर का चिराग जल गया उसकी मां बाप से पूछो क्या होगा ऐसी स्थिति बाढ़ गंगा क्षेत्र में भी हो रही है कोई बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है
*ब्रह्मपुर–खानपुर–लक्सर क्षेत्र में “तालाब निर्माण / मत्स्य पालन” की आड़ में चल रहे अवैध खनन पर गंभीर प्रश्न,
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की भूमिका पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न* ****हरिद्वार जनपद के ब्रह्मपुर–खानपुर–लक्सर क्षेत्र में *“तालाब निर्माण”* और *“पिसीकल्चर”* के नाम पर बड़े पैमाने पर उप-खनिज निकासी की गतिविधियाँ लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय स्तर पर जो तथ्य, वीडियो साक्ष्य और स्थल निरीक्षण से प्राप्त जो जानकारी मिली है, उससे स्पष्ट है कि वास्तविक तालाब निर्माण के बजाय अवैध खनन गतिविधियों को वैधता का आवरण दिया जा रहा है।मातृ सदन द्वारा इस विषय में जिला प्रशासन को अनेक बार लिखित/मौखिक अवगत कराया गया। संबंधित वीडियो साक्ष्य, आवेदन और अन्य प्रमाण भी उपलब्ध कराए गए। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई न होना प्रशासनिक निष्क्रियता, मिलीभगत व हाई लेवल भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण है।*जिलाधिकारी हरिद्वार श्री मयूर दीक्षित* को इस पूरे प्रकरण की जानकारी दिए जाने के बावजूद जानबूझकर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया, जो उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न है। मातृ सदन के प्रतिनिधि इस विषय को लेकर दो बार उनसे व्यक्तिगत रूप से मिले, और उनके द्वारा कार्यवाही का आश्वासन देने के बावजूद वो मौन हैं, इससे स्पष्ट है कि मिलीभगत का स्तर बहुत बड़ा है। *इसी प्रकार जिला खान अधिकारी श्री काजीम रजा की भूमिका को लेकर भी अनेक प्रश्न हैं। इनका भ्रष्टाचार तो सर्वविदित है।* यदि शिकायतों पर संवाद तक न हो, फोन तक न उठे, और शिकायतों को सुनने तक से परहेज़ हो, तो ऐसे अधिकारी को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।क्षेत्र में कार्यरत लिमरा स्टोन क्रशर इस पूरी गतिविधि का प्रमुख लाभार्थी है — इस पहलू पर भी कोई जांच नहीं की गई है। तालाब निर्माण के दौरान माल को स्टोन क्रशर को बेचने का कौन-सा प्रावधान है व किस नियमावली में इसका वर्णन है, इसका उत्तर जिला प्रशासन द्वारा आतिथि नहीं दिया गया है। मातृ सदन के लीगल नोटिस व सूचनाधिकार में मांगी गई जानकारी पर भी प्रशासन मौन है।यह केवल अवैध खनन का प्रश्न नहीं है; यह हरिद्वार की भूमि, पर्यावरण, भूजल और प्रशासनिक नैतिकता का प्रश्न है। यदि “तालाब निर्माण” जैसे लोकहितकारी कार्यों की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, तो यह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है।मातृसदन द्वारा इस विषय में माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर किया गया है। बहरहाल माँग करते हैं उच्च न्यायालय के आदेश व पर्यावरणीय क्षति के मद्देनजर इस तथाकथित निर्माण की आड़ में विध्वंसक कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए व इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जाँच हो। खनन की मात्रा, अनुमति और वास्तविक उपयोग का सार्वजनिक खुलासा हो व जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जाँच हो ।

