॥ शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी ने शास्त्रार्थ की चुनौती स्वीकार की ॥
रामपाल द्वारा चारों पीठ के शंकराचार्यों को शास्त्रार्थ की चुनौती और 50 लाख के पुरस्कार की घोषणा पर शंकराचार्य जी का जवाब –
शंकराचार्य परंपरा में शास्त्रार्थ की महत्वपूर्ण भूमिका है, इससे कोई आपत्ति नहीं। लेकिन पहले यह बताना होगा कि कौन-कौन से शास्त्र पढ़े हैं और किन शास्त्रों को प्रमाण मानकर पक्ष रखेंगे। शास्त्रार्थ शास्त्र, प्रमाण और मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए।
🕉️ हर हर शंकर – जय जय शंकर 🕉️

