BREAKING | उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
“पत्नी के पहले पति के बेटे के भरण-पोषण से इनकार नहीं कर सकता पति!” – जस्टिस आलोक महरा
उत्तराखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आलोक महरा ने Rapti v. State of Uttarakhand & Another मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति पत्नी के पहले पति से हुए बच्चे की जानकारी होने के बावजूद उससे शादी करता है और बच्चे को अपने परिवार का हिस्सा मानकर साथ रखता है, तो बाद में केवल जैविक पिता न होने के आधार पर उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता।
यह मामला हरिद्वार फैमिली कोर्ट के आदेश से जुड़ा था, जिसमें पत्नी और बेटी को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन बेटे को जैविक पिता न होने के आधार पर इनकार कर दिया गया था।
हाईकोर्ट का नया आदेश:
- पत्नी का भरण-पोषण: ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रतिमाह
- नाबालिग बेटी का भरण-पोषण: ₹6,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह
- सौतेला बेटा (पहले पति का बेटा): ₹10,000 प्रतिमाह, अर्जी की तारीख से बालिग होने तक
कोर्ट ने स्पष्ट किया – पत्नी के पूर्व पति से हुआ समझौता वर्तमान पति को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।
आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं।

