उत्तराखंड संस्कृत संस्थान हरिद्वार द्वारा 18वें संस्कृत महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय संस्कृतस्पर्धा 2026-27 का शुभारम्भ महाजन भवन भूपतवाला हरिद्वार में किया गया।

😍शीर्षक – – ” संस्कृत विभिन्न संस्कृति की एकता, सदाचरण एवं विज्ञान की भाषा ।”- स्वामी चिदानन्द मुनि जी महाराज

13 जनपदों का 18 वें संस्कृत महोत्सव का हरिद्वार में भव्य शुभारम्भ।

हरिद्वार । उत्तराखंड संस्कृत संस्थान हरिद्वार द्वारा 18वें संस्कृत महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय संस्कृतस्पर्धा 2026-27 का शुभारम्भ महाजन भवन भूपतवाला हरिद्वार में किया गया।

राज्य स्तरीय प्रतिस्पर्धा के उद्घाटन समारोह के अवसर पर पतंजलि गुरुकुलम टिहरी की बालिकाओं द्वारा वैदिक मंगलाचरण तथा वंदे मातरम् राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया गया । मंचासीन अतिथियों के स्वागत हेतु डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी खटीमा के छात्र छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।


उद्घाटन समारोह के अवसर पर पावन सानिध्य परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर श्री स्वामी चिदानंद मुनि महाराज, कार्यक्रम के मुख्यातिथि के रूप में उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव श्री दीपक कुमार , नगर निगम हरिद्वार की महापौर एवं कार्यक्रम अध्यक्ष श्रीमती किरण जैसल, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ नवीन चन्द्र पंत, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव डॉ विनय कुमार विद्यालंकार, , संस्कृत शिक्षा निदेशालय की निदेशक श्रीमती मंजू भारती, संस्कृत शिक्षा निदेशालय के उपनिदेशक एवं संस्कृत शिक्षा हरिद्वार के सहायक निदेशक डॉ वाजश्रवा आर्य, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की वित्त अधिकारी श्रीमती माया देवी, संस्कृत भारती उत्तराखंड के प्रांत अध्यक्ष डॉ आनंद भारद्वाज आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव एवं राज्य स्तरीय संस्कृतस्पर्धा के मुख्य समन्वयक प्रो विनय कुमार विद्यालंकार द्वारा मंच पर उपस्थित समस्त अतिथि गणों का माल्यार्पण, स्मृति चिन्ह, तथा उत्तरीय वस्त्र प्रदान कर स्वागत किया गया।


कार्यक्रम का कुशल संचालन उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के शोध अधिकारी एवं राज्य स्तरीय संस्कृत स्पर्धा के राज्य समन्वयक डॉ हरीश चंद्र गुरुरानी ने किया।

उद्घाटन समारोह के अवसर परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर श्री स्वामी चिदानंद मुनि ने सभी को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा ही संस्कृति की वाहक है जो सभी संस्कारों की जननी है। संस्कृत भाषा भय को भगाती है, भावों को जाग्रत करती है तथा वसुधैव कुटुंब सत्प्रेरणा देती है। संस्कृत भाषा ही देव भाषा, दिव्य भाषा है। संस्कृत संगम और संयम की भाषा है।
उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव एवं कार्यक्रम के मुख्य राज्य समन्वयक डॉ विनय कुमार विद्यालंकार ने बताया कि विकासखण्ड तथा जनपद स्तर पर संस्कृत स्पर्धाओं में प्रदेश में सभी प्रकार के विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, कान्वेंट स्कूल, पब्लिक स्कूल, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, गुरुकुल, संस्कृत विद्यालय, विद्यामन्दिर के छात्र, छात्राओं , शिक्षक, प्रधानाचार्य, प्राचार्य सहित पचास हजार से अधिक व्यक्तियों द्वारा प्रतिभाग किया गया और इस दो दिवसीय राज्य स्तरीय स्पर्धा में तेरह जनपदों के प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।
मंचासीन अतिथियों द्वारा समस्त प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए प्रतिस्पर्धाओं हेतु अपनी शुभकामनाएं प्रदान की।
मुख्यातिथि तथा उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृत स्पर्धाओं से व्यक्तित्व का निर्माण होता है एवं प्रतिभा में निखार आता है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं नगर निगम हरिद्वार की महापौर श्रीमती किरण जैसल ने कहा कि संस्कृत की विभिन्न स्पर्धाओं से संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार, संवर्धन एवं संरक्षण होता है।
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के प्रथम दिवस कनिष्ठ वर्ग में संस्कृत समूह नृत्य, संस्कृत आशुभाषण, संस्कृत वाद-विवाद, संस्कृत समूहगान, तथा वरिष्ठ वर्ग में संस्कृत नाटक, संस्कृत समूहनृत्य, संस्कृत आशुभाषण, एवं संस्कृत वाद-विवाद सहित कुल 8 स्पर्धाएं आयोजित की गई।
विभिन्न स्पर्धाओं में श्री गिरीश चन्द्र तिवारी, हंसवी टॉक, प्रोफेसर हरीश चन्द्र तिवारी, डॉ मूलचन्द्र शुक्ल, प्रो. रामरतन खण्डेलवाल, डॉ रवीन्द्र आर्य, डॉ प्रिया पाण्डेय, श्री गुरु राकेश महाराज, प्रो बिन्दुमती द्विवेदी, डॉ हिमाचल कुमारी, डॉ राघव झा, डॉ पुरुषोतम, डॉ अरुण कुमार मिश्र, डॉ प्रीति, डॉ नारायण दत मिश्र आदि द्वारा निर्णायक की भूमिका का निर्वहन किया ।
इस अवसर पर हरिद्वार जनपद संयोजक डॉ विजय कुमार त्यागी , डॉ केशव दत बलियानी, डॉ रोशन लाल गौड़, घनश्याम उनियाल, डॉ सुशील कुमार त्यागी, डॉ राधेश्याम बहुखण्डी, मनोज शर्मा, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के प्रशासन अधिकारी डॉ किशोरी लाल रतूड़ी, प्रशासनिक अधिकारी लीला रावत, जगतनयन बहुखण्डी, कुलदीप मेंदोला, तारादत अवस्थी आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में नीमा गैरोला, लावण्या गैरोला ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ायी।कार्यक्रम में डॉक्टर मूलचंद शुक्ल द्वारा रचित कालिदास लघुत्रयी पुस्तक का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। समाचार लिखे जाने तक कार्यक्रम जारी रहे।

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