आज ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद के अनशन का चौथा दिन था।

आज ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद के अनशन का चौथा दिन था। प्रशासन की भूमिका पहले की तरह पूरी तरह असंवेदनशील, उदासीन और संदिग्ध बनी हुई है। अनशन के चार दिन बीत जाने के बावजूद न तो किसी सक्षम अधिकारी ने मौके पर आकर स्थिति का संज्ञान लिया है और न ही उठाए गए गंभीर सवालों का कोई उत्तर दिया गया है। यह मौन अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि माफियाओं को संरक्षण का स्पष्ट संकेत है।

कल मातृ सदन द्वारा श्यामपुर क्षेत्र से जुड़े कुछ वीडियो सार्वजनिक किए गए थे, जिनमें गंगा तट के पास ही एक विशाल महलनुमा निर्माण कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसे प्रथम दृष्टया एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल से जुड़ा हुआ बताया गया। इन वीडियो के व्यापक प्रसार के बाद आज उक्त निर्माण स्थल की देखरेख करने वाले दो व्यक्ति मातृ सदन पहुंचे और निर्माण को लेकर सफाई देने का प्रयास किया।
उन दोनों व्यक्तियों ने दावा किया कि उक्त भूमि अथवा भवन का एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह देहरादून स्थित एक पैरामेडिकल साइंसेज़ के संस्थान ‘डॉल्फिन इंस्टिट्यूट’ से संबंधित है, जो वहां मनोरंजनात्मक प्रयोजनों के लिए एक गेस्ट हाउस का निर्माण कर रहा है। जब उनसे पूछा गया कि भूमि मूलतः किसकी है, तो उन्होंने कहा कि यह किसी निजी व्यक्ति की थी और विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से स्थानांतरित की गई है।

आगे पूछने पर कि क्या यह भूमि उसी साध्वी की नहीं थी, जो वर्तमान में उक्त भवन के पीछे रहती हैं और जिन्हें भूमि हस्तांतरण के लिए मजबूर किया गया, तो उनका उत्तर था कि साध्वी ने स्वेच्छा से भूमि बेची है और उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं। जब यह सवाल उठाया गया कि साध्वी के एक रिश्तेदार को पुलिस थाने में बंदूक की नोक पर बैठाकर दबाव बनाया गया, और करोड़ों रुपये (लगभग 20 करोड़) की भूमि को बेहद मामूली राशि में बेचने के लिए मजबूर किया गया, तो इस पर वे दोनों पूर्णतः मौन हो गए।

इसके पश्चात उनसे यह भी पूछा गया कि एक पैरामेडिकल साइंसेज़ का संस्थान श्यामपुर जैसे क्षेत्र में, जहां पर्यटन का नाममात्र का दबाव है, इतनी विशालकाय गेस्ट हाउस जैसी संरचना क्यों बना रहा है। इस पर उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि वे भी इस प्रश्न को लेकर असमंजस में हैं।

हमने यह भी प्रश्न उठाया कि जब श्यामपुर में ही गंगा तट पर स्वामी यतीश्वरानंद का आवास भूमि उपयोग परिवर्तन के दस्तावेजों में खामी के आधार पर ध्वस्त किए जाने का आदेश पा चुका है, तो फिर एक आश्रम की भूमि का उपयोग “मनोरंजनात्मक प्रयोजन” के लिए बदलने की अनुमति आखिर कैसे दी गई। इस प्रश्न पर भी कोई उत्तर नहीं दिया गया।
मातृ सदन ने स्पष्ट किया कि इन तथ्यों के सामने आने के बाद संबंधित साध्वी के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही यह जानकारी भी सामने आई है कि उक्त निर्माण कार्य में एक क्रशर माफिया की संलिप्तता है। यह भी आशंका व्यक्त की गई कि फिलहाल यह भवन भले ही किसी अन्य के नाम पर दिखाया जा रहा हो, परंतु बाद में इसे हस्तांतरित कर वास्तविक लाभार्थियों को सौंपने की योजना हो सकती है, ताकि जांच और सार्वजनिक नज़रों से बचा जा सके। यह भी बार बार सामने आ रहा है कि यह भवन अंततः एसएसपी प्रमेन्द्र दोभाल को भी दिया जाएगा ।

स्थिति चाहे जो भी हो, यह स्पष्ट है कि पूरे मामले में उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच तत्काल गठित की जानी चाहिए। किसी साध्वी के अधिकारों को भय, दबाव और सत्ता के दुरुपयोग के माध्यम से छीना जाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। इस पूरे प्रकरण से जुड़े प्रश्न आज भी खुले हुए हैं और प्रशासन का मौन उन्हें और भी गंभीर बनाता है।

यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कल होने वाली प्रेस वार्ता में इस पूरे संघर्ष से जुड़े कई अन्य पहलुओं को सार्वजनिक किया जाएगा, जिनमें स्वामी यतीश्वरानंद द्वारा संचालित व्यापक भूमि माफियागिरी, अमित चौहान के सहयोगियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर, तथा उनके पूर्व के हमलों का विस्तृत विवरण शामिल होगा।

इसके साथ ही यह प्रश्न भी यथावत बना हुआ है कि अब तक एचआरडीए के सचिव मनीष कुमार एवं तहसीलदार सचिन कुमार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई है। प्रशासन की यह चुप्पी न केवल संदेह पैदा करती है, बल्कि कानून के राज की अवधारणा पर भी गहरा आघात करती है।

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