- आज ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी के अनशन का 9वाँ दिन है । कल प्रशासन व पुलिस के प्रतिनिधि वार्ता हेतु आश्रम आए, परंतु उनके द्वारा उनकी मांगों पर कोई भी सकारात्मक पहल या कार्रवाई हेतु आश्वासन नहीं दिया गया। उनके अनुरोध को न स्वीकारते हुए ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी ने अपना अनशन जारी रखने की घोषणा की।
- ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी का अविछिन्न अनशन शासन-प्रशासन में भीतर तक अपनी जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार, भू माफियाओं को खुलेआम दिया जा रहा प्रशासनिक व पुलिसिया संरक्षण, जनपद हरिद्वार की प्राकृतिक संपदा को खुलेआम लूट कर कुछ चंद माफियाओं को पोषित करने के विरुद्ध, जनहित में आवाज उठाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध झूठे मुक़दमें व प्रशासनिक अराजकता और अन्याय के विरुद्ध है। इनमें विशेष रूप से दो व्यक्तियों के नाम, स्वामी यतीश्वरानंद और एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, जिनके जनपद हरिद्वार में विधि-विरुद्ध किए जा रहे अनेक कृत्यों के प्रमाण एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। इसमें एक हाई-लेवल कमिटी बनाकर इन समस्त मामलों की जांच कर जनपद हरिद्वार को उक्त अभिशापों से तत्काल मुक्त किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
- हरिद्वार को माफियाओं का गढ़ बनाने में यहां के पुलिस के आला अधिकारी एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल का बहुत बड़ा रोल है। यह बहुत गंभीर बात है कि बड़े ही संगठित रूप से हरिद्वार जैसी संवेदनशील जगह, जहां अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, आपराधिक षड्यन्त्र, अव्यवस्था, विधि-विहीनता व्यापक है, उसी अनुपात में उक्त अधिकारी और उन्हें संरक्षित करने वाले तथाकथित स्वामी की संपत्ति में भी बढ़ोत्तरी हुई है। इस संबंध में पूर्व में और वर्तमान में भी प्रत्येक तथ्य प्रमाण के साथ सामने रख रहे हैं, जिससे स्वयं तय किया जा सकता है कि ये प्रमाण और तर्क प्रत्येक बिंदु पर खरे उतरते हैं।
- अपराधियों को संरक्षण देने के संबंध में उल्लेखनीय है कि दिनांक 28 जनवरी 2026 को ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी, तहसील व जिला हरिद्वार में सुबह लगभग 10:00 बजे घटित हुई घटना में पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई प्रथम तहरीर पर एफआईआर दर्ज न कर, अमित चौहान के बेबुनियाद, अनर्गल कथनों के आधार पर आला अधिकारियों की मिलीभगत से एक एफआईआर दर्ज की गई, जो प्रथम तहरीर के लगभग 2 घंटे बाद की है। इसके पश्चात दिनांक 30 जनवरी 2026 को अतुल चौहान की पत्नी द्वारा तहरीर देकर मामले में शिकायत दर्ज कराने का आग्रह किया गया, जिसके पश्चात अपराध के अनुपात में कम गंभीर धाराओं में देर रात एक एफआईआर दर्ज की गई, परंतु फिर भी अमित चौहान व उसके गुर्गों के विरुद्ध अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
- यह बहुत ही गंभीर बात है कि भू-माफिया/आक्रमणकर्ताओं का पक्ष, पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है, वह भी एसएसपी ऑफिस के अंदर बैठकर, जबकि पुलिस प्रशासन द्वारा अब तक नियमानुसार उनके विरुद्ध एफआईआर में दर्ज शिकायतों के संबंध में अग्रिम कार्रवाई की जानी चाहिए थी। एफआईआर में जिन व्यक्तियों के नाम हैं, नियमानुसार पुलिस द्वारा नोटिस प्राप्त होने के उपरांत यदि वे जमानत लेते हैं, तो उस क्रम में इस प्रकार खुलेआम हुजूम बनाकर एसएसपी ऑफिस के अंदर घूमना अपने आप में जमानत की शर्तों का उल्लंघन होगा। और यदि उन्हें अभी तक पुलिस द्वारा नोटिस देकर कार्रवाई शुरू भी नहीं की गई है, तो यह भी अपने आप में एक बहुत ही गंभीर बात है, क्योंकि इससे उन्हें मिल रहा संरक्षण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है।
- पुलिस के पास उक्त घटना के पश्चात, जैसा उनके बयानों से स्पष्ट है कि उन्हें घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज प्राप्त हो चुका है, जिससे यह भी अबतक स्पष्ट हो जाना चाहिए कि जानलेवा हमला अमित चौहान और उसके गुर्गों द्वारा एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत, पूर्व नियोजित और हत्या की मंशा से किया गया। जिसने अपराध सोचा और उसे क्रियान्वित किया, उनका कृत्य पूर्ण रूप से आपराधिक श्रेणी का है। आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई एक प्रतिक्रियात्मक/डिफेंस माध्यम से की गई कार्रवाई है, जिसे पुलिस समझते हुए नहीं समझना चाहती, लेकिन न्यायालयीय प्रक्रिया के बाद जो अपने-आप में सिद्ध हो जाएगा। परंतु इसके बावजूद पुलिस द्वारा वास्तविक अपराधियों के विरुद्ध अपने स्तर से कार्रवाई न किया जाना अपने-आप में एक बहुत गंभीर परिस्थिति को उजागर कर रहा है।
- दूसरी बहुत ही गंभीर बात यह है कि समस्त घटनाक्रम का जो मूल बिंदु है, उस पर तत्काल रूप से नियमबद्ध कार्रवाई हेतु शासन-प्रशासन बाध्य है। मातृ सदन की मांग है कि जिस प्रकार जनपद हरिद्वार में बड़े पैमाने पर भू-माफिया शासन-प्रशासन के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिसका प्रमाण है कि पूर्व में भी नियमविरुद्ध ढंग से जनपद हरिद्वार में धारा 143 जमींदारी उन्मूलन अधिनियम के तहत व्यापक स्तर पर भू-उपयोग परिवर्तन किए गए और वर्तमान में भी यह जारी है, जिसमें एक प्रकरण में तत्कालीन जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी व एक अन्य तक को भी निलंबित होना पड़ा था। क्यूंकि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी प्रदेश में कृषि भूमि अत्यधिक सीमित है। जिस प्रकार से व्यापक स्तर पर अवैध ढंग से बागों का कटान व कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तित किया जा रहा है, यदि इसे तत्काल नहीं रोका गया और भू-माफियाओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के साथ-साथ उत्तराखंड के विनाश की नींव रखने जैसा है। इसलिए इस संबंध में मातृ सदन द्वारा जितनी भी शिकायतें दी गईं हैं, उसपर हाई लेवल जांच बैठें ।
- तीसरा और अत्यंत गंभीर मुद्दा यह है कि जो यह तथाकथित स्वामी और इन भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे अधिकारी हैं या वे जो इतनी शिकायतों के बावजूद इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, उनकी स्वयं की जांच कितनी आवश्यक है, यह इस प्रकरण से स्पष्ट होता जा रहा है। स्वामी यतीश्वरानंद द्वारा या उनके संरक्षित गुर्गों द्वारा बहुत ही बड़े पैमाने पर अवैध ढंग से बागों का कटान किया गया, नियमविरुद्ध भू-उपयोग परिवर्तन करवाए गए, अवैध कॉलोनियां काटी गईं, प्रशासन व शासन के अधिकारियों पर दबाव बनाकर अनेक प्रकार की नियमविरुद्ध स्वीकृतियां ली गईं, जो मातृ सदन के संज्ञान में लाईं गईं हैं, जो दस्तावेज़ यहाँ संलग्न किया जा रहा है ।
- इसके अतिरिक्त एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल की श्यामपुर कांगड़ी में निर्माणाधीन एक विशाल महलनुमा भवन, जिसकी सूचना कई आसपास के स्थानीय लोगों द्वारा पुष्ट की जा चुकी है, तथा इसके संबंध में शिकायतें मातृ सदन को लगातार अनेक माध्यमों से प्राप्त हो रही हैं। इसके अतिरिक्त श्री प्रमेंद्र डोभाल व उनकी पारिवारिक संपत्ति में 2021 से 2024 के बीच कई गुण बढ़ोत्तरी, जिसे उन्होंने स्वयं घोषित किया है, एक गिफ्ट डीड जो उनके आईपीआर में मौजूद नहीं है, और अनेक ऐसे प्रमाण मातृ सदन को प्राप्त हुए हैं, जो यह अपने आप में सिद्ध कर रहे हैं कि जनपद हरिद्वार में अपराध के ग्राफ और अधिकारियों की संपत्ति में एक ही अनुपात में वृद्धि किस प्रकार हो रही है। यह एक बड़े स्तर पर गहन जांच का विषय है। मातृ सदन कोई भी बात बिना प्रमाण के नहीं कहती है, इसलिए एसएसपी के संबंध में यहां कहे गए तथ्यों के समस्त दस्तावेजिय प्रमाण इस प्रेस नोट के साथ संलग्न किए जा रहे हैं।
- इन सबकी जांच अति आवश्यक है, क्योंकि यह बहुत गंभीर मामला है कि पुलिस-प्रशासन अब निरंकुश हो चुके माफियाओं का साथ दे रहा है और बुनियादी स्तर पर माफियाओं को संरक्षण तथा सत्य को दबाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। भ्रष्टाचार उन्मूलन मातृ सदन के मूलभूत सिद्धांतों में निहित है और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार यदि मातृ सदन के संज्ञान में लाया जाता है और उसकी पुष्टि होती है, तो मातृ सदन पूर्ण रूप से उसके विरुद्ध आवाज उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।
- पुनः स्पष्ट कर दें कि हम समस्त विषय पर गहन जांच चाहते हैं। यह जनपद हरिद्वार और पूरे प्रदेश के अस्तित्व का प्रश्न है। जब तक उक्त सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक मातृ सदन का सतत आंदोलन जारी रहेगा। ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी का अनशन जारी है। प्रशासन और पुलिस के उत्तरदायित्व और कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न है। प्रश्न सबसे बड़ा न्याय का है।
मातृ सदन, हरिद्वार

