सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न करने और बाद में देरी से अपील या रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, नहीं तो न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी तय समय सीमा के भीतर कोर्ट को किसी वास्तविक कठिनाई की जानकारी नहीं देता, तो बाद में प्रशासनिक अड़चन या आदेश को लागू करना असंभव होने का तर्क कंटेम्प्ट की कार्रवाई से बचने का आधार नहीं बन सकता।
बेंच ने कहा कि हाल के दिनों में यह देखा जा रहा है कि कोर्ट के आदेशों का लंबे समय तक पालन नहीं किया जाता और जब अवमानना (कंटेम्प्ट) की याचिका दायर होती है, तब बहुत देर से अपील दाखिल की जाती है। बेंच ने कहा कि देरी से अपील दाखिल करना अपवाद होना चाहिए लेकिन अब यह नियम बनता जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा, हाई कोर्ट को ऐसे बेईमानी वाले केस करने वालों से सख्ती से निपटना चाहिए, खासकर तब जब वे संविधान के आर्टिकल 12 के तहत ‘स्टेट’ या ऐसी ही कोई संस्था हों।’ SC ने कहा, ‘जब तक हाई कोर्ट इन बातों से सख्ती से नहीं निपटते, तब तक इस देश के आम केस करने वालों का हर लेवल पर ज्यूडिशियरी से भरोसा टूटेगा।

