कितने किसानों ने सपना देखा होगा कि वह अपनी लड़कियों की बेटों की शादी फसल उठने के बाद करेंगे जिस पर एक उम्मीद होती है परंतु ईश्वर भी ऐसा हो रहा है की फसल के समय पर हीं ऐसी आपदा लाता है को किस को दोहरी मार देता है पहले सरकार देती उसके बाद ईश्वर देता है उसके बावजूद भी किस किसी को अपनी अंतरात्मा नहीं बताता है ना कुछ होता है ना रो सकता है कैसा पल किसान के लिए है

उसके बाद सरकारी अधिकारी आते हैं मुआवजे के नाम पर पैसे लूट जाते हैं
अन्नदाता पर ईश्वर की मार बहुत दुख होता है जब किसान साल भर मेहनत कर फसल तैयार करता है कुछ ही समय में ईश्वर किसान की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर देता है यह दृश्य पूर्व प्रधान नूतन कुमार के खेत का जहां हरी भरी फसल कुछ समय पहले लहरा रही थी लेकिन रात के समय में तेज हवा कुछ बरसात की वजह से पूरी फसल बर्बाद हो गई और किसानों का भी काफी नुकसान हुआ है ईश्वर की ऐसी मार किसान पर पड़ती है की चाह कर भी किसान ना तो रो सकता है और ना ही हो हंस सकता है लेकिन इसके बावजूद भी किसान एक बार फिर इसी प्रकार से मेहनत करेगा की आने वाले फसल में कुछ लाभ होगा फिर वह उसी प्रकार से अपने दिनचर्या पर लग जाएगा इसलिए किसान के लिए राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए ताकि किसान भी अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ सके अच्छे से अपना जीवन यापन कर सके क्योंकि जिस समय किसान की फसल तैयार होती है कुछ ना कुछ प्राकृतिक का ऐसा मिजाज होता है सभी ओलावृष्टि कभी हवा कभी अधिक बारिश किसान के सपनों को चूर-चूर कर देते हैं एक तरफ किसान प्राकृतिक आपदा का सामना करता है दूसरे और रात दिन मेहनत कर जंगली हाथियों से अपनी फसल को बचाता है लेकिन राज्य सरकार दोनों जगह ना तो किसान की फसल को जंगली हाथियों से बचाने के लिए कोई ठोस समाधान नहीं करते और ना ही प्राकृतिक आपदा में होने वाले नुकसान का मुआवजा किस को देती है जिस कारण किसान हर समय कर्ज में डूबा रहता हैं क्षेत्रीय नेताओं को जैसे जिला पंचायत सदस्य विधायक प्रधान जिला पंचायत सदस्यों को जिला पंचायत की मीटिंग में एवं विधायक को सत्र में एवं प्रधान को बीड़ी सी की मीटिंग में अपने स्तर पर किसान की समस्या को उजागर करना चाहिए ताकि किसान की नुकसान का कुछ तो मुवाजा जिला स्तर से या राज्य स्तर से प्राप्त हो सके जय जवान जय किसान पूर्व प्रधान बताते हैं कि किसानों के लिए नेता और अधिकारी मात्र बजट बनाते हैं और उसके बाद गुम हो जाते हैं मुआवजा के नाम पर दिए जाते हैं ₹75 अब बतयो ईश्वर पर भरोसा करें या सरकर पर इसलिए हिंदुस्तान का किसान जय जवान जय किसान

