- दिनांक 28 जनवरी 2026 को ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी (तहसील व जिला हरिद्वार) में घटित घटना के कई प्रमाण अब सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं। घटना के तत्काल बाद जिस रूप में उसे दर्शित किया गया तथा घटना से संबंधित जो डिजिटल साक्ष्य थे, उनके सामने आने के पश्चात यह स्पष्ट हो गया है कि वास्तविक घटना कुछ और ही थी। मातृ सदन यह बात आज से नहीं बल्कि बार-बार कहते आ रहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों का एक बहुत बड़ा वर्ग माफियाओं द्वारा बैठाया गया है, जो माफियाओं के हितों को संरक्षित करने तथा उनके लिए कार्य करने में निरंतर संलग्न है।
- नूरपुर पंजनहेड़ी में घटित घटना के संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि दिनांक 14 जनवरी 2026 को मातृ सदन द्वारा जिलाधिकारी हरिद्वार तथा उपाध्यक्ष हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को एक पत्र प्रेषित किया गया था, जिसमें खसरा संख्या 154 व 158, ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी, तहसील व जिला हरिद्वार में तथाकथित स्वीकृति के नाम पर गलत ढंग से स्वीकृत भूमि के तीन से चार गुना हिस्से पर की जा रही अवैध प्लाटिंग की जानकारी दी गई थी। इस संबंध में गूगल अर्थ से प्राप्त प्रमाणित छायाचित्र उपलब्ध हैं तथा मौके पर भी इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
- अपर जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा दिनांक 15 जनवरी 2026 को सचिव हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को पत्र जारी कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसके क्रम में दिनांक 17 जनवरी 2026 को सचिव हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा तहसीलदार हरिद्वार एवं राजस्व अधिकारियों को आदेशित किया गया कि उक्त मामले में किसी भी कीमत पर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। दिनांक 27 जनवरी 2026 तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई व संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि उन्हें आधिकारिक रूप से सूचित तक नहीं किया गया व तहसीलदार सचिन कुमार एक पटवारी के साथ स्वयं ही रिपोर्ट देने की तैयारी में है। इस क्रम में दिनांक 27-01-2026 को मातृ सदन के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी सुधानंद तहसील हरिद्वार में तहसीलदार सचिन कुमार से मिले, जिस दौरान तहसीलदार द्वारा अभद्र ढंग से बिना जांच किए यह टिप्पणी की गई कि वहाँ कुछ गलत नहीं हो रहा है, लेकिन ब्रह्मचारी सुधानंद के तहसील कार्यालय से निकालने के पश्चात ही पटवारी नूरपुर पंजनहेड़ी हरिंदर रावत द्वारा फोन कर 28-01-2026 को सुबह 10 बजे जांच के संबंध में सूचित किया गया, और विशेष रूप से मौके पर आने के लिए कहा गया ।
- विदित हो कि उक्त मामलों में यह संपूर्ण शिकायत माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका संख्या 119/2013, अनुज कंसल बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य में पारित आदेश दिनांक 19-06-2018 पर आधारित है, जिसे तत्कालीन माननीय न्यायमूर्ति श्री राजीव शर्मा जी एवं श्री लोकपाल सिंह जी द्वारा पारित किया गया था। उक्त आदेश के पृष्ठ संख्या 6 के पैरा 14 के पांचवें बिंदु में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उत्तराखंड, जो एक पहाड़ी राज्य है, जहां कृषि भूमि का प्रचुर अभाव है, अतः राज्य सरकार राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कृषि भूमियों को ग्रुप हाउसिंग, सोसायटी आदि के लिए भू-परिवर्तन की अनुमति नहीं देगी। यही नियम बाग की भूमि पर भी लागू होंगे। केवल वही किसान जो स्वयं अपनी भूमि पर घर बनाना चाहता है, उसे इस नियम से छूट प्राप्त होगी, अन्यथा किसी भी प्रकार का कॉलोनी कटान अथवा वाणिज्यिक निर्माण उत्तराखंड की कृषि व बाग की भूमि पर पूर्णतः प्रतिबंधित है।
- इस आदेश को उत्तराखंड सरकार द्वारा सिविल अपील संख्या 5620/2024, कमल सिंह चौहान बनाम उत्तराखंड राज्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसका निस्तारण माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 30 अप्रैल 2024 के माध्यम से किया जा चुका है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश के पृष्ठ संख्या 9 के पैरा 19 में स्पष्ट किया है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कृषि एवं बाग भूमि को गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करते हुए राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता दी कि यदि उसे कोई स्पष्टीकरण चाहिए तो वह पुनः माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय का रुख कर सकती है।
- इससे यह पूर्णतः स्पष्ट है कि आदेश दिनांक 19-06-2018 में किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया। इसके बावजूद उत्तराखंड राज्य में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि तहसील स्तर से लेकर शासन स्तर तक इन आदेशों की खुलेआम अवहेलना की गई। तहसील प्रशासन द्वारा अवैध रूप से जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 143 के अंतर्गत कृषि एवं बाग भूमि का भू-उपयोग धड़ल्ले परिवर्तित किया गया, लेकिन उल्लेख किया गया कि यदि भू-स्वामी/स्वयं किसान के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति निर्माण करता है तो यह परिवर्तन स्वतः निरस्त माना जाएगा। इस प्रकाश में जितनी भी कृषि या बाग की भूमि, जिसमें अवैध कॉलोनियाँ काटी गईं हैं, जहां किसान स्वयं नहीं रह रहा है, उनके भू-उपयोग परिवर्तन स्वतः निरस्त माने जाएंगे ।
- केवल ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी एवं ग्राम जियापोता, तहसील व जिला हरिद्वार में लगभग 100 बीघा आम के बाग अवैध रूप से काटे गए तथा लगभग 250 बीघा से अधिक कृषि भूमि को माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध गैर-कृषि उपयोग में लाया गया। यह सब तहसील प्रशासन, जिला प्रशासन एवं उत्तराखंड शासन के अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया, जिससे अमित चौहान जैसे भू-माफियाओं को अत्यधिक लाभ पहुंचाया गया।
- ग्राम नूरपुर पंजनखेड़ी के खसरा संख्या 22M, 48, 164, 165, 168 (खसरा 168 घेर कर रख लिया गया है, परंतु निर्माण नहीं हुआ है), 169/1, 171/3 तथा ग्राम जियापोता के खसरा संख्या 25, 27, 29, 30/1 से 30/8 तक अमित कुमार पुत्र उदेश कुमार, सचिन कुमार पुत्र उदेश कुमार, नीलिमा पत्नी अमित कुमार, शिवानी पत्नी सचिन कुमार, उषा देवी माता अमित कुमार, मनोज कुमार पुत्र महावीर सिंह आदि द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध रजिस्ट्रियां करवाईं गईं। कई मामलों में भू-उपयोग परिवर्तन के बिना ही रजिस्ट्रियां कर दी गईं तथा एचआरडीए द्वारा ऐसे नक्शे भी स्वीकृत किए गए जिनमें भू-उपयोग परिवर्तन था ही नहीं। विशेषकर वर्ष 2021 से 2025 के बीच किए गए ये सभी अवैध कृत्य खतौनी एवं भूलेख रिकॉर्ड में दर्ज हैं तथा इन्हें रिट याचिका संख्या 116/2023, अतुल चौहान बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य के माध्यम से माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया है।
- यह भी सर्वविदित है कि रिट याचिका संख्या 116/2023 में अंतिम निर्णय आने से पूर्व भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को पूर्व में अधिकृत किया गया था और एचआरडीए के पूर्व उपाध्यक्ष श्री अंशुल सिंह के कार्यकाल से पहले, यह स्पष्ट रूप से आदेशित किया जाता रहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 19 जून 2018 के अनुपालन में कृषि एवं बाग भूमि का गैर-कृषि उपयोग अनुमन्य नहीं है। किंतु श्री अंशुल सिंह के कार्यकाल में इन आदेशों को पूर्णतः दरकिनार कर दिया गया और एचआरडीए की 81वीं, 82वीं एवं 83वीं बोर्ड बैठकों में अमित चौहान व उसके सहयोगियों की बड़े पैमाने पर अवैध याचिकाएं स्वीकार की गईं।
- नूरपुर पंजनहेड़ी निवासी अतुल चौहान द्वारा वर्ष 2021 से लगातार इन मामलों में शिकायतें की जाती रहीं, आपत्तियां दर्ज कराई गईं, किंतु एचआरडीए द्वारा उन्हें पूरी तरह अनदेखा किया गया। इन सभी शिकायतों का रिकॉर्ड मातृ सदन के पास उपलब्ध है। मातृ सदन के हस्तक्षेप के बाद जब यह समस्त तथ्य श्री अंशुल सिंह के समक्ष रखे गए तो उनके द्वारा प्रारंभिक चरण में कार्रवाई के बजाय कानूनी टकराव का रास्ता अपनाया गया। अंततः 25 जून 2025 को एचआरडीए द्वारा आदेश पारित किया गया कि ग्राम नूरपुर पंजनखेड़ी एवं ग्राम जियापोता में भू-उपयोग परिवर्तन के संबंध में कोई भी आपत्ति या सुझाव माननीय उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद ही प्रकाशित किए जाएंगे।
- यह भी उल्लेखनीय है कि इन दोनों ग्रामों में एचआरडीए द्वारा दी गई स्वीकृतियां संबंधित मास्टर प्लान के प्रतिकूल थीं। इसके बावजूद मातृ सदन द्वारा निरंतर शिकायतें एवं लीगल नोटिस दिए जाते रहे, जिसके परिणामस्वरूप यह निर्णय लिया गया कि अब किसी भी भू-उपयोग परिवर्तन की अनुशंसा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा नहीं की जाएगी और यह कार्य शासन स्तर पर ही किया जाएगा।
- इसी क्रम में खसरा संख्या 154 एवं 158 ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी में स्थित 8973 वर्ग मीटर कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन एचआरडीए की 83वीं बोर्ड बैठक में स्वीकृत किया गया, जो पूर्णतः धोखाधड़ीपूर्ण था। पूर्व में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि हाईकोर्ट के आदेशों के विरुद्ध कोई स्वीकृति नहीं दी जाएगी, किंतु बाद में एक अन्य कानूनी राय, जो डीजीसी सिविल हरिद्वार से ली गई, उसमें सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के आदेशों को नहीं माना गया और एचआरडीए को स्वीकृति हेतु अधिकृत किया गया। इसी तथाकथित कानूनी सलाह के आड़ में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को दरकिनार किया गया। अमूमन ऐसे मामलों में, जहां सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की समीक्षा होनी है, इसे न्याय विभाग, उत्तराखंड शासन को भेजा जाना चाहिए था, लेकिन नियमानुसार चलने से इन समस्त क्रियाकलापों से उत्पन्न हो रही भ्रष्टाचार की बड़ी आय पूर्णतः रुक जाती। पूर्व उपाध्यक्ष एचआरडीए इस बात को भली-भांति समझ चुके थे, इसलिए ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी और ग्राम जियापोता से उन्होंने अपने हाथ खींच लिए। लेकिन जो आदेश उनके द्वारा पहले ही पारित किए जा चुके थे, उसे वापस लेने में वे स्वयं को असमर्थ पा रहे थे।
- खसरा संख्या 154 एवं 158 के अंतर्गत तथाकथित 14 बीघा स्वीकृति की आड़ में 70 बीघा से अधिक भूमि पर अवैध रूप से बागों का कटान कर कॉलोनी विकसित की जा रही थी, जिसकी शिकायत मातृ सदन द्वारा लगातार की गई।
- इसी पृष्ठभूमि में दिनांक 28 जनवरी 2026 की घटना कोई एकांगी घटना नहीं थी। प्रशासन की मौजूदगी में हथियारों से लैस माफियाओं का सरकारी पैमाइश के दौरान हमला करने को तैयार रहना, तहसीलदार सचिन कुमार की स्पष्ट भूमिका जो ब्रह्मचारी सुधानंद को उनके द्वारा किए गए कॉल से स्पष्ट है, घटनास्थल पर प्रशासनिक वाहनों की उपस्थिति के बीच गोलीबारी व हाथापाई तथा घटना के दिन अचानक मातृ सदन को फोन कर दबाव बनाने की चेष्टा करना—यह सब पूर्व नियोजित थीं। मातृ सदन ने इस संबंध में समस्त संबंधितों के फोन कॉल रिकार्ड की जांच की मांग की है। घटना के दिन अतुल चौहान के पास लाइसेंसी पिस्तौल होने से ही उनकी जान बच सकी, अन्यथा जान-माल की बड़ी हानि निश्चित थी। पूर्व में भी सचिन चौहान द्वारा अतुल चौहान पर जानलेवा हमला किया जा चुका है, जिसका विडिओ प्रमाण उपलब्ध है, व जिसका उल्लेख माननीय उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में दर्ज है।
- घटना से पूर्व आज तक तहसीलदार सचिन कुमार द्वारा कभी भी मातृ सदन को फोन नहीं किया गया, न कभी किसी मैसेज का जवाब दिया गया, लेकिन घटना के दिन सुबह 10:21 बजे प्रथम बार तहसीलदार सचिन कुमार ने मातृ सदन को फोन किया और इस बात पर जोर दिया कि यदि आप घटनास्थल पर नहीं आए तो हम अपने मन-मुताबिक रिपोर्ट बनाकर वापस जा रहे हैं। यानि मातृ सदन के प्रतिनिधि पर हथियारों से लैस माफियाओं से जानलेवा करवाने की पूरी तैयारी थी। यह भी विदित हो कि शासन-प्रशासन से जब भी उक्त माफियाओं के संबंध में शिकायत की गई, तो एक ही बात बार-बार दोहराई गई कि यह स्वामी यतीश्वरानंद का मामला है, यानी इतना भारी भ्रष्टाचारी है कि हमें साहस भी नहीं है कि हम इन मामलों में कोई कार्रवाई कर सकें।
- मातृ सदन यह स्पष्ट करना चाहती है कि घटना को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से दोषी अधिकारी व माफिया न्याय के चंगुल से बच नहीं सकते। साथ ही हरिद्वार के कुछ पत्रकारों से यह कहना चाहेंगे कि वे तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों का अवलोकन किए बिना अनर्गल प्रलाप न करें। सत्य उजागर हो चुका है। इसलिए तथ्यों के अनुरूप ही रेपोर्टिंग करें।
- मातृ सदन पुनः अपनी मांगें दोहराता है— हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष कुमार सिंह एवं तहसीलदार सचिन कुमार को दोषियों की सूची में जोड़ा जाए, गलत ढंग से जोड़े गए नाम तत्काल हटाए जाएं, एक स्वतंत्र एसआईटी गठित की जाए टो समस्त मामले की जांच करे, भू-माफियाओं के विरुद्ध की गई समस्त शिकायतों पर उच्च स्तरीय समिति बने, स्वामी यतीश्वरानंद एवं एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल की संपत्ति की जांच हो, सभी उजागर प्रकरणों के तथ्य जनता के समक्ष रखे जाएं तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई तत्काल की जाए।
- न्याय प्रणाली का उद्देश्य पूर्ण न्याय है। जनहित में कार्य करने वालों को निशाना बनाना, माफियाओं को संरक्षण देना और पूरे सिस्टम को भ्रष्टाचार में झोंक देना मातृ सदन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी। अतः प्रशासन से अपेक्षा है कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद, जिनका अनशन आज पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है, उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
उत्तराखंड सरकार द्वारा सिविल अपील संख्या 5620/2024, कमल सिंह चौहान बनाम उत्तराखंड राज्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, कोर्ट के द्वारा कृषि भूमि पर कॉलोनी काटने के लिए रोक लगाई गई थी

