राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने यूपी सरकार के मंत्री और विधायकों से कार्यशैली सुधारने को कहा।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने यूपी सरकार के मंत्री और विधायकों से कार्यशैली सुधारने को कहा।

सभी को सरकार के खिलाफ विवादित बयान न देने की सलाह दी।

सीएम आवास पर शुक्रवार को 3 बजे सरकार, संघ और भाजपा प्रदेश संगठन की बैठक हुई, जो करीब साढ़े चार घंटे तक चली। इसमें 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर मंथन हुआ।

सीएम योगी के साथ बैठक में दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक, आरएसएस के सह सरकार्यवाहक अरुण कुमार, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, आरएसएस के पूर्वी क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार और पश्चिम क्षेत्र प्रचारक महेंद्र कुमार समेत सभी छह प्रांतों के प्रचारक मौजूद रहे।

सीएम आवास पर हुई बैठक में संघ के अवध, काशी, ब्रज, कानपुर, गोरक्ष और पश्चिम प्रांत के पदाधिकारियों ने बारी-बारी से अपनी बातें कहीं। सर संघचालक मोहन भागवत ने यूपी दौरे में प्रांतों की मीटिंग की थी। वहीं, योगी ने भी प्रांतीय समन्वय बैठक की थीं। इसमें सामने आया कि सरकार के कुछ मंत्रियों और विधायकों का अनुषांगिक संगठनों से समन्वय नहीं है। संगठनों से जुड़े कामकाज भी नहीं हो रहे हैं।

विधायकों की विवादित बयानबाजी से भी माहौल खराब हो रहा है। ऐसी स्थिति में जनता में संदेश गलत जा रहा है। उसे सुधारने की आवश्यकता है। बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जनता में ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए, जिससे यह लगे कि सरकार में कहीं टकराव है या सरकार और संगठन में मतभेद है।
बैठक में चुनाव से पहले संघ, सरकार और भाजपा में एकजुटता दिखाने पर बात हुई। लव जेहाद और अवैध धर्मांतरण रोकने और नेपाल से सटे जिलों में खास नजर रखने की भी चर्चा की गई।
संघ ने आगामी चुनावों के मद्देनजर यूपी में जाति की जगह राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाने पर बल दिया। सरकार के मंत्री और विधायक जाति के मुद्दे पर कुछ न बोंले, बल्कि राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर ही माहौल बनाएं।

सरकार की ओर से बैठक में बताया गया कि निगम, आयोग और बोर्ड में समायोजन का सिलसिला शुरू हो गया है। भाजपा की ओर से मिली सूची के अनुसार पार्षदों को मनोनीत करने का सिलसिला शुरू हो गया है। शेष निगम, बोर्ड और आयोग में भी जल्द नियुक्तियां की जा रही है।
पंचायत चुनाव के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जवाब दिया जाएगा। सरकार आगामी कैबिनेट में ओबीसी आयोग का गठन कर सकती है।

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