यह अत्यंत आक्रोशजनक, निंदनीय और स्तब्ध करने वाला समाचार है कि आज मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर प्रयागराज के संगम नोज के समीप स्नान-शोभायात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने परमाराध्य ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्यों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट कर कई संतों को घायल कर दिया।
यह घटना किसी भी दृष्टि से “स्थिति नियंत्रण” का प्रयास नहीं लगती, जैसा कि यूपी पुलिस दावा कर रही है, बल्कि यह एक सुनियोजित, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक ढंग से की कार्यवाही है।
गंभीर प्रश्न उठते हैं—
• संतों एवं शंकराचार्य जी के स्नान हेतु पृथक एवं सम्मानजनक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
• पुलिस को यह अधिकार किसने दिया कि वह संन्यासियों, साधु-संतों पर इस प्रकार क्रूर बल प्रयोग करे?
• निर्धारित SOP का पालन क्यों नहीं किया गया और बल प्रयोग की स्थिति क्यों उत्पन्न होने दी गई?
• क्या यह शंकराचार्य पद की गरिमा का घोर अपमान नहीं है कि उनसे रथ से उतरकर पैदल चलने को कहा गया?
• शांतिपूर्ण स्नान सुनिश्चित करने हेतु सुरक्षा घेरा क्यों नहीं बनाया गया?
• सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि संतों के विरुद्ध FIR दर्ज की गई—क्या अब धर्माचार्य अपराधी माने जाएंगे?
यह पूरी घटना संत समाज के सम्मान पर सीधा प्रहार है और इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कार्यवाही राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। आज इस घटना ने योगी सरकार के दोहरे चरित्र को भी पूर्णतः उजागर कर दिया है—एक ओर धर्म और संतों की बात, दूसरी ओर उन्हीं संतों पर लाठियाँ।
मातृ सदन इस कायरतापूर्ण, असंवैधानिक और अधार्मिक कृत्य की कड़े शब्दों में घोर निंदा करती है। मातृ सदन संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कारण बताओ नोटिस जारी करेगी तथा पीड़ित संतों को हर संभव कानूनी, नैतिक और सार्वजनिक सहयोग प्रदान करेगी।

