हिंदू नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार जेल सर्वजन कल्याण हेतु श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है कथा के सप्तम दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया बिना गुरु के गति नहीं होती है बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिल सकता

मनोज ठाकुर
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हिंदू नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार जेल सर्वजन कल्याण हेतु श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है कथा के सप्तम दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया बिना गुरु के गति नहीं होती है बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिल सकता है

हिंदू नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार जेल सर्वजन कल्याण हेतु श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है कथा के सप्तम दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया बिना गुरु के गति नहीं होती है बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिल सकता

हिंदू नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा जिला कारागार रोशनाबाद हरिद्वार जेल सर्वजन कल्याण हेतु श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है कथा के सप्तम दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया बिना गुरु के गति नहीं होती है बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिल सकता

इसलिए मनुष्य को जीवन में गुरु की शरण में जाना चाहिए शास्त्री जी ने बताया मनुष्य के प्रथम गुरु माता पिता बताए गए हैं माता-पिता से ही बच्चों को संस्कार मिलते हैं माता-पिता के बादउ शिक्षा गुरु जिनसे हमें अच्छी-अच्छी शिक्षाएं मिलती हैं और फिर आता है दीक्षा गुरु जिनसे मंत्र प्राप्त कर के मंत्र जाप के द्वारा हम अपना आध्यात्म कल्याण कर सकते हैं सद्गुरु ही हमें असत्य से सत्य की ओर अंधकार से प्रकाश की ओर एवं मृत्यु से अमृत की ओर लेकर के जाता है गुरु के द्वारा दिए गए ज्ञान से हमारे भीतर का अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट हो जाता है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु धारण करना चाहिए शास्त्री जी ने बताया कि स्त्री के लिए उसका पति ही उसका गुरु है पति गुरु से गुरु मंत्र प्राप्त करें पत्नी अपने पति से वह मंत्र प्राप्त करके उसका जाप करें तभी जाकर के उसका आध्यात्म कल्याण हो सकता है स्त्री के लिए पर पुरुष का चिंतन एवं ध्यान शस्त्रों में अपराध बताया गया है सप्तम दिवस की कथा में द्वारिकाधीश के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह का वर्णन, सुदामा जी का पावन चरित्र एवं दत्तात्रेय जी के 24 गुरुओं का वर्णन करते हुए सभी भक्तों ने सुखदेव जी का पूजन संपन्न किया इस अवसर पर श्री अखंड परशुराम अखाड़ा राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया माता-पिता की सेवा से बढ़कर के और कुछ नहीं है अगर जीवन में बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त हो गया सारे दुख दरिद्र कष्ट संकट दूर हो जाते हैं जिला कारागार वरिष्ठ अधीक्षक मनोज आर्य ने बताया श्री अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन बहुत ही सराहनीय कार्य कारागार में किया गया आगे भविष्य में भी ऐसे यज्ञ अनुष्ठान निरंतर कारागार में चलते रहने चाहिए इससे यहां का वातावरण शुद्ध एवं पवित्र होता है इस अवसर पर स्वामी कार्तिक गिरी महाराज,बगलामुखी साधक नीलेंद्र गौतम,बलविंदर चौधरी,कुलदीप शर्मा, मनोज ठाकुर,जलज कौशिक,कारागार प्रशासन से उपस्थित डॉ राकेश गैरोला,मुख्य फार्मेसी अधिकारी,सोमदेव प्रभारी जेलर,प्रमोद दानु,डिप्टी जेलर,दीन दयाल,सुनील कुमार,मुकुल कम्बोज,इंद्रपाल शर्मा,संजय शर्मा,पंकज शर्मा,दीपक भारद्वाज, वीके त्रिपाठी,अंकित शर्मा,कपिल शर्मा,अरुण कांत शर्मा,अजय शर्मा,सतीश त्यागी,सुंदर सिंह रावत,नवनीत मोहन,मुकेश कुमार शर्मा,सतीश तिवारी,पंडित सचिन पैन्यूली,पंडित आदित्य जागुड़ी, बृजमोहन शर्मा संजू अग्रवाल आदि ने भागवत पूजन सम्पन्न किया

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