स्थान: मातृ सदन, हरिद्वार
प्रयागराज घटना के विरोध में मातृ सदन में आयोजित बैठक व प्रेस वार्ता सम्पन्न
जागरूक नागरिकों, किसान संगठनों एवं जनआंदोलनों ने एक स्वर में की कड़ी निंदा

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज पर परमाराध्य ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज एवं उनके शिष्यों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई बर्बरता, अभद्रता, बल प्रयोग और अपमानजनक व्यवहार के विरोध में आज मातृ सदन, हरिद्वार में एक व्यापक जनाक्रोश बैठक एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
बैठक में प्रदेश के विभिन्न जनसंगठनों, किसान संगठनों, बेरोज़गार मंच, महिला मंच तथा सामाजिक आंदोलनों से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों एवं जागरूक नागरिकों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में इस घटना को संविधान, आध्यात्मिक परंपरा और चेतना पर सीधा आघात बताया।
सभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य श्री गुरुदेव स्वामी श्री शिवानंद जी महाराज ने कहा कि शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर आसीन एक संत से 24 घंटे में उनकी “प्रामाणिकता सिद्ध करने” की मांग करना इस देश की आत्मा पर प्रहार है। यह भारत की संपूर्ण आध्यात्मिक विरासत को नकारने का प्रयास है। उन्होंने गंभीर प्रश्न उठाया कि किसी मेला अधिकारी को यह अधिकार किसने दिया कि वह शंकराचार्य से उनकी वैधता पर प्रश्न करे। यह कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने न केवल प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए, बल्कि हरिद्वार सहित देशभर के साधु-संन्यासियों की चुप्पी पर भी आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत शोचनीय विषय है कि जब शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर आसीन संत पर आक्रमण किया जा रहा है, तब अनेक साधु-संन्यासी मौन साधे बैठे हैं। यह चुप्पी अज्ञानवश नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए सत्ता से निकटता बनाए रखने की मानसिकता का परिणाम है।
श्री गुरुदेव जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आज शंकराचार्य पर प्रहार हो रहा है और संत समाज मूकदर्शक बना हुआ है, तो कल यह आग हर संन्यासी, हर आश्रम और हर आध्यात्मिक परंपरा तक पहुँचेगी। उन्होंने इसे संन्यास परंपरा के आत्ममंथन का क्षण बताते हुए कहा कि जो साधु-संन्यासी अन्याय के विरुद्ध नहीं बोलते, वे अधर्म को बल प्रदान कर रहे हैं।
उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के वरिष्ठ नेता श्री ध्यानी जी ने कहा कि प्रशासन इस घटना के माध्यम से एक नए निम्नतम स्तर पर पहुँच गया है। यह हमारे विश्वास पर सीधा हमला है। उन्होंने सवाल उठाया कि “सनातन की रक्षा” के नाम पर आखिर किसे संरक्षित किया जा रहा है, जबकि आस्था के केंद्रों पर ही प्रहार हो रहा है।
पूर्व नौसेना अधिकारी श्री थापलियाल जी ने इसे प्रशासनिक पतन की पराकाष्ठा बताया और कहा कि यह घटना हमारी संस्कृति के संरक्षक माने जाने वाले सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर हमला है, जो पूरे समाज की आस्था को झकझोरती है।
किसान मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष श्री भोपाल सिंह चौधरी तथा बेरोज़गार संघ के प्रतिनिधियों ने इसे सरकार का अत्यंत निंदनीय और असंवेदनशील कृत्य बताया और कहा कि संतों, किसानों और आम जनमानस के आत्मसम्मान के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
डॉ. विजय वर्मा ने कहा कि देश की संस्थाओं को क्रमबद्ध ढंग से कमजोर किया गया है और अब सीधा हमला हमारे मूल विश्वासों पर हो रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
दंडी स्वामी देवाश्रम जी ने कहा कि यह उन लोगों की मानसिकता को दर्शाता है जिन्हें वास्तविक आध्यात्मिकता से भय है।
श्रीमती सुनीता जी ने वर्तमान शासन की नीतियों पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि यह दौर महिलाओं की गरिमा पर भी आघात करता है, जिसका उदाहरण अंकिता भंडारी प्रकरण है।
बैठक में स्वामी करणगिरी जी, श्री प्रफुल्ल श्यानी जी, श्री दिनेश वालिया जी सहित अनेक गणमान्य संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भी अपने विचार रखे और घटना की तीव्र भर्त्सना की।
बैठक के अंत में मातृ सदन, हरिद्वार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस प्रकरण को केवल विरोध तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विधिक, संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से न्याय प्राप्त करने तक संघर्ष जारी रहेगा। इस घटना को कारित/क्रियान्वित करवाने वालों के विरुद्ध फौजदारी व सिविल मानहानि का दावा किया जाएगा और साथ ही यह संकल्प लिया गया कि देश के आध्यात्मिक शिखर पर आसीन व्यक्तित्व की गरिमा, संत समाज के सम्मान और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

