मातृ सदन, हरिद्वार स्वामी आत्माबोधनंद महाराज का अनशन पर तीसरा दिन

मनोज ठाकुर

दिनांक 02-02-2026
मातृ सदन, हरिद्वार

  1. आज ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी के अविछिन्न अनशन का तीसरा दिन है। प्रशासन पूर्णतः निष्क्रिय, असंवेदनशील और मूकदर्शक बना हुआ है। गंभीर प्रश्न अभी भी वही है, क्या उत्तराखण्ड का शासन-प्रशासन माफियाओं के नियंत्रण में चलेगा? क्या प्रदेश में कानून का शासन समाप्त हो चुका है?
  2. मातृ सदन में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तराखण्ड पुलिस व प्रशासन की भूमिका जिस रूप में उभरकर इस समस्त घटनाक्रम में सामने आई है, उसको लेकर अत्यंत गंभीर और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाले प्रश्न सार्वजनिक रूप से रखे गए हैं ।
  3. मातृ सदन द्वारा पुलिस एवं जिला प्रशासन से पूछे गए 15 सीधे, स्पष्ट और तथ्यात्मक प्रश्नों को 48 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, किंतु अब तक एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया। इसे क्या माना जाए, प्रशासन और माफियाओं का गठजोड़ या गंभीर अपराध में मौन सहभागिता?
  4. मातृ सदन के एक संत एवं अन्य पूर्णतः निर्दोष व्यक्तियों को जघन्य आपराधिक धाराओं में फँसाना एक सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत क्रियान्वित किया गया घोर आपराधिक कृत्य है । जब अकाट्य और निर्विवाद इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, तब पुलिस प्रशासन उत्तर देने से क्यों कतरा रहा है?
  5. घटना-स्थल पर पटवारी स्वयं सरकारी रिकॉर्ड हाथ में लेकर मौजूद था। उनके सामने अमित चौहान सहित अन्य माफिया शिकायतकर्ता अतुल चौहान एवं अन्य लोगों पर हमला करने को तैयार थे। फिर भी पुलिस को मौके पर तत्काल क्यों नहीं बुलाया गया? तहसीलदार सचिन कुमार, जो खुद कॉल रिकॉर्डिंग में स्वीकार रहे हैं कि वो घटनाक्रम के दौरान मौके पर ही हैं, इसके बावजूद पटवारी एवं तहसीलदार के नाम अबतक FIR में क्यों नहीं जोड़े गए?
  6. पुलिस आखिर किसे और क्यों बचा रही है? क्या वास्तविक अपराधियों को? क्या भू माफियाओं को? क्या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्तियों को?
  7. दिनांक 27-01-2026 से 28-01-2026 तथा उसके बाद की अवधि में स्वामी यतीश्वरानन्द, तहसीलदार सचिन कुमार, अमित चौहान एवं उसके सहयोगियों की Call Record Details जब्त कर इस गंभीर षड्यन्त्र को क्यों नहीं उजागर किया जा रहा? क्या इसलिए कि इससे मातृ सदन के संतों एवं अन्य लोगों की हत्या की साजिश का व्यापक पर्दाफाश हो जाएगा?
  8. सचिन चौहान के अनेक वीडियो सामने आ चुके हैं— कहीं खून नहीं, वह स्वयं गाड़ी से बाहर आता है, ठीक से चलता है, अस्पताल के अंदर आराम से बैठकर पानी पीता है। फिर अचानक SP और SO कनखल अस्पताल पहुँचते हैं, एक कहानी गढ़ी जाती है कि मामला गंभीर है, बिना किसी मेडिकल परीक्षण के उसे सीधे Higher Centre भेज दिया जाता है। क्यों? उद्देश्य क्या था? क्या केस की दिशा पहले से तय कर दी गई थी?
  9. अब तक SIT का गठन क्यों नहीं किया गया? जबकि यह मामला केवल एक घटना का नहीं, बल्कि भू माफिया, उनके संरक्षक स्वामी यतीश्वरानन्द, पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत,
    अवैध कॉलोनियाँ, सरकारी भूमि पर कब्ज़ा, और मातृ सदन के संतों के विरुद्ध षड्यंत्र जैसे गंभीर और व्यापक मुद्दों से जुड़ा है।
  10. विश्वस्त सूत्रों से भूमि कब्जे के मामलों में एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल पर भी गंभीर आरोप हैं । एक आश्रम की भूमि पर कब्जा कर, माफियाओं से सांठ-गांठ कर अपने लिए वे श्यामपुर में भव्य महलनुमा आवास का निर्माण करवा रहे हैं। इसके फोटो और वीडियो भी मातृ सदन को प्राप्त हो चुके हैं। सामान्य नागरिक को वहाँ खड़े होकर देखने तक की अनुमति नहीं है। बहुत गंभीर प्रश्न है, क्या किसी अधिकारी की वैध आय से ऐसे विशाल विला का निर्माण संभव है? यदि नहीं, तो संसाधन कहाँ से आए? भूमि किसकी है? कोई जाँच क्यों नहीं?
  11. यही स्थिति स्वामी यतीश्वरानन्द के श्यामपुर स्थित गंगा तट के किनारे बने रिसॉर्ट सह आवास की है। HRDA के सचिव द्वारा इस अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के स्पष्ट आदेश पारित किए जा चुके हैं। इसकी कॉपी संलग्न है । पूर्ण दस्तावेज़ भी मातृ सदन के पास उपलब्ध हैं। फिर भी आज तक आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ? कौन अधिकारी इस धवस्तिकरण के आदेश पर बैठे हैं? आदेश की अवहेलना की शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं? इतना बड़ा गठजोड़? क्या प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है?
  12. गंगा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण हुआ है। अमित चौहान द्वारा खड़ी की गई भू माफिया संरचना के पीछे स्वामी यतीश्वरानन्द का सक्रिय संरक्षण रहा है, यह बात सर्वविदित है। प्रशासन में किसी को स्वामी यतीश्वरानन्द के गुर्गों के मामलों में हस्तक्षेप करने की इजाजत नहीं है। प्रशासन में भी कई ऐसे अधिकारियों को स्थानांतरित कर लाया गया जो यातीश्वरानंद के इशारे पर काम कर सके। एचआरडीए सचिव मनीष कुमार सिंह और तहसीलदार सचिन कुमार इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। इसी संरक्षण के बल पर माननीय सुप्रीम कोर्ट एवं उत्तराखंड हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के विरुद्ध अवैध कॉलोनियाँ काटी गईं। शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। विशेष रूप से ग्राम नूरपुर पंजहेड़ी एवं जियापोता में 2021 से 2025 के बीच HRDA द्वारा दिए गए सभी अवैध अनुमोदन अतुल चौहान की जनहित याचिका (PIL संख्या 116/2023, अतुल चौहान बनाम राज्य उत्तराखण्ड) में माननीय उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
  13. अमित चौहान की माता श्रीमती उषा देवी, जिनके नाम पर “उषा टाउनशिप” विकसित की जा रही है, के विरुद्ध अवैध वृक्ष कटान को लेकर FIR दर्ज है । अमित चौहान के कई मामलों में भूमि उपयोग परिवर्तन के बिना ही एचआरडीए द्वारा नक्शे स्वीकृत किए गए। नियमविरुद्ध हरित पट्टी, बागों एवं कृषि भूमि को अवैध कॉलोनियों और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में बदला गया। इन सभी तथ्यों को बार-बार प्रशासन के समक्ष रखा गया। उत्तर में न्याय देने के बजाय यह षड्यंत्र रचा गया।
  14. गंभीर प्रश्न उठता है— क्या उत्तराखण्ड में कानून का शासन रहेगा या माफिया शासन चलाएंगे? स्वामी यतीश्वरानन्द कौन हैं कि बिना किसी सरकारी पद के आज भी उत्तराखण्ड सरकार के लेटरहेड का प्रयोग कर अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं? यह राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम के उल्लंघन में गंभीर अपराध है। अधिकारियों को क्यूँ यतीश्वरानन्द के आदेश मानने के लिए बाध्य किया जा रहा है? शासन द्वारा अबतक इसका संज्ञान लेकर यतीश्वरानंद के विरुद्ध कार्यवाही क्यूँ नहीं की गई?
  15. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा स्वामी यतीश्वरानन्द एवं अमित चौहान को यह विशेष संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? क्या भू माफिया द्वारा नागरिकों की जमीन पर किए जा रहे अवैध कब्ज़े और उगाही को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
    एक आत्मरक्षा की घटना को साजिशन अपराध का रूप गया जो अपने आप में पुलिस द्वारा किया गया गंभीर अपराध है। मातृ सदन इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त करने वाली नहीं है । माफियागिरी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अपराध के विरुद्ध यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जबतक इसमें वास्तविक दोषियों को सज़ा नहीं मिलत

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