मनोज ठाकुर
कुंभ मेला का आयोजन क्यों किया जाता है क्या महत्व है बताया गया स्वामी जी के द्वारा
कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा पवित्र समागम है जो प्रयागराज हरिद्वार नासिक और उज्जैन में हर 12 साल में आयोजित होता है ! विशाल आध्यात्मिक समागम है, जिसका महत्व पापों के नाश, मोक्ष की प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में है। यह हर 12 साल में हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में, ग्रहों की विशेष स्थिति के अनुसार आयोजित होता है, जहाँ पवित्र स्नान से श्रद्धालु आत्मीय शुद्धि और ज्ञान प्राप्त करते हैं।
स्वामी परमानंद जी को युगपुरुष क्यों कहते हैं
कुंभ मेला का आयोजन क्यों किया जाता है क्या महत्व है बताया गया अखंड पुरम धाम के परम अध्यक्ष युग पुरुष के नाम से विख्यात श्री राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी स्वामी परमानंद गिरि जी के उत्तराधिकारी ज्योतिर्माननंद गिरी जी महाराज जी के द्वारा कुंभ के विषय में विस्तृत चर्चा की गई स्वामी जी द्वारा बताया गया की कुंभ 2027 में उत्तराखंड की धामी सरकार के द्वारा भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन करने के लिए पूरा मेला प्रशासन सरकार के साथ लगा हुआ है और प्रयागराज की प्रेरणा लेकर हरिद्वार में विशाल महाकुंभ का आयोजन 2027 में किया जाएगा जिसमें मेला अधिकारी गंभीरता से लगी हुई है और हरिद्वार के साधु संतों को साथ लेकर मेला प्रशासन काम कर रहा है
कुंभ मेले का महत्व
आध्यात्मिक और मोक्ष: मान्यता है कि कुंभ के दौरान पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, गोदावरी, शिप्रा) में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है।
अमृत की मान्यता (पौराणिक महत्व): समुद्र मंथन के दौरान अमृत की प्राप्ति के बाद, कलश (कुंभ) से अमृत की बूंदें इन चार स्थानों पर गिरी थीं, जिससे इन नदियों में विशेष ऊर्जा का संचार होता है।
ज्योतिषीय महत्व: बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा के विशेष ज्योतिषीय संरेखण (ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव) के समय कुंभ आयोजित होता है, जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है।
सांस्कृतिक एकता: यह भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का प्रतीक है, जहाँ लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, और अखाड़े एक साथ आते हैं।
शाही स्नान: शाही स्नान (प्रमुख शुभ तिथियों पर) कुंभ का मुख्य आकर्षण है, जिसमें साधु-संतों का समूह पवित्र नदियों में डुबकी लगाता है।
यह मेला ना केवल धार्मिक, बल्कि एक अद्भुत सांस्कृतिक मेला भी है, जहाँ भारतीय संस्कृति, ज्ञान और आध्यात्मिकता का संगम देखने को मिलता है
क्या आप जानना चाहते हैं कि 2027 में कुंभ मेला कहाँ पर है
आगामी 2027 कुंभ को लेकर हरिद्वार से मेला अधिकारी के विषय में क्या बोल रहे है हरिद्वार के संत
कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा पवित्र समागम है जो प्रयागराज हरिद्वार नासिक और उज्जैन में हर 12 साल में आयोजित होता है ! विशाल आध्यात्मिक समागम है, जिसका महत्व पापों के नाश, मोक्ष की प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में है। यह हर 12 साल में हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में, ग्रहों की विशेष स्थिति के अनुसार आयोजित होता है, जहाँ पवित्र स्नान से श्रद्धालु आत्मीय शुद्धि और ज्ञान प्राप्त करते हैं।
और हरिद्वार आध्यात्मिक नगरी है यहां पर गंगा की नगरी है यहां पर कुंभ का विशेष महत्व रहता है जब भी कोई आयोजन हरिद्वार में होता है तो देश-विदेश के श्रद्धालु आते हैं जिसकी व्यवस्था सरकार और महिला अधिकारी और आश्रमों के द्वारा की जाती है आगामी 2027 के कुंभ को दिव्य और भव्य होगा इसकी हम कामना करते हैं
और मोक्ष: मान्यता है कि कुंभ के दौरान पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, गोदावरी, शिप्रा) में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है।
अमृत की मान्यता (पौराणिक महत्व): समुद्र मंथन के दौरान अमृत स्नान का महत्व होता है अखाड़ों के साथ मिलकर सभी संत स्नान करते हैं कुंभ संतों का एक समागम है जहां पर संतों के साथ उनके श्रद्धालु भक्त स्नान करते हैं और सरकार उनकी व्यवस्थाएं बनाती है
कुंभ मेला 2027 को भव्य और दिव्य कुंभ बनाने में सरकार लगी हुई है श्री अखंड परम धाम के परम अध्यक्ष युग पुरुष के नाम से विख्यात श्री राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी स्वामी परमानंद गिरि जी के उत्तराधिकारी ज्योतिर्माननंद गिरी जी महाराज जी के द्वारा कुंभ के विषय में विस्तृत चर्चा की गई स्वामी जी द्वारा बताया गया की कुंभ 2027 में उत्तराखंड की धामी सरकार के द्वारा भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन करने के लिए पूरा मेला प्रशासन सरकार के साथ लगा हुआ है और प्रयागराज की प्रेरणा लेकर हरिद्वार में विशाल महाकुंभ का आयोजन 2027 में किया जाएगा जिसमें मेला अधिकारी गंभीरता से लगी हुई है और स्वामी द्वारा बताए गए जिस तरह से एक महिला पूरे घर को चलती है ऐसे ही हरिद्वार मेला अधिकारी बनकर आई मेला अधिकारी भी 2027 कुंभ को भव्य दिव्य कुम्भ करायेगी क्योंकि सनातन में देवियों में ही शक्ति है हो और हम सभी के लिए गर्व की बात है

