आज से हिंदू नववर्ष एवं क्षेत्र नवरात्रों की शुरुआत हो गई है श्रद्धालुओं की मंदिरों में अपार भीड़ देखने को मिल रही है

मनोज ठाकुर

हिंदू नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र के पहले नवरात्रि पर आप दर्शन कीजिए माता मनसा देवी की


आज से हिंदू नववर्ष एवं क्षेत्र नवरात्रों की शुरुआत हो गई है श्रद्धालुओं की मंदिरों में अपार भीड़ देखने को मिल रही है

धर्मनगरी हरिद्वार में पावन चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। मां शक्ति की आराधना के इस पावन पर्व पर मनसा देवी मंदिर में हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

सुबह से ही मनसा देवी पर्वत की ओर जाने वाले पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। “जय माता दी, जोर से बोलो जय माता दी, प्रेम से बोलो जय माता दी” के जयकारों के साथ भक्त माता के दरबार की ओर बढ़ते नजर आए।

भक्ति और उत्साह के साथ चढ़ते रहे भक्त
मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पैदल मार्ग से पहाड़ की चढ़ाई करते हुए मां के दरबार तक पहुंच रहे थे। कई श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए और कई स्पीकर पर माता के भजन सुनते हुए माता के दरबार की ओर बढ़ रहे थे।

भक्ति का यह दृश्य इतना मनमोहक था कि हर तरफ केवल श्रद्धा, आस्था और भक्ति की ही झलक दिखाई दे रही थी। कुछ श्रद्धालु पहाड़ी रास्तों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हुए मां के दर्शन के लिए जा रहे थे, तो कई श्रद्धालु रोपवे (उड़न खटोला) के माध्यम से भी माता के दरबार तक पहुंच रहे थे।

प्रसाद और श्रद्धा के साथ मां के चरणों में अर्पित हुईं मनोकामनाएं
माता के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित किया। कोई नारियल और चुनरी चढ़ा रहा था, तो कोई पेड़ा, बर्फी और फल माता के चरणों में अर्पित कर रहा था।

भक्तों के मन में केवल एक ही भावना थी—
“हे मां, हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करें।”
किसी ने अपने व्यापार में उन्नति की कामना की, किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि मांगी, तो कोई संतान प्राप्ति की प्रार्थना करता दिखाई दिया। कई युवा अपने विवाह और भविष्य की खुशियों के लिए भी मां से प्रार्थना करते नजर आए।

चामुंडा माता मंदिर में बांधे गए मनोकामना के धागे
मनसा देवी मंदिर परिसर में स्थित चामुंडा माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।

यहां भक्त अपनी मनोकामनाओं के साथ लाल धागा बांधते हुए दिखाई दिए। श्रद्धालु धागा बांधते समय माता का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामना बोलते और संकल्प लेते हुए कहते—

“हे मां, जब हमारी मनोकामना पूर्ण होगी, तब हम वापस आकर यह धागा खोलेंगे और आपका प्रसाद अर्पित करेंगे।”

नवरात्र के पहले ही दिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां धागा बांधते हुए दिखाई दिए।

मनसा देवी क्यों कहलाती हैं ‘मनोकामना पूर्ण करने वाली’
इस अवसर पर महंत डॉ. रवींद्र पुरी, जो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि मां का नाम मनसा देवी इसलिए है कि वह मन बात जान लेती है वह भक्तों की मनसा अर्थात मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और श्रद्धा से माता के दरबार में आता है, मां उसकी हर प्रार्थना अवश्य सुनती हैं।

भाव की भूखी हैं मां मनसा देवी
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि माता केवल भाव की भूखी हैं।

उन्होंने बताया कि जरूरी नहीं कि भक्तों को सभी मंत्र या विधि-विधान आते हों। यदि कोई भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से माता को याद करता है, तो मां उसकी हर पुकार सुनती हैं और उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं से नवरात्रों के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और अपने भाव से माता की पूजा करने का आह्वान किया।

हर दिन उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि नवरात्रों के दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से भी हजारों भक्त हरिद्वार पहुंचते हैं और मां मनसा देवी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं।

यही कारण है कि मनसा देवी मंदिर आस्था और विश्वास का एक विशाल केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम
चैत्र नवरात्रि के पहले ही दिन मनसा देवी पर्वत पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि मां शक्ति में लोगों की आस्था आज भी अटूट है।

माता के दरबार में गूंजते जयकारे, भक्ति गीतों की धुन और श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखाई देता विश्वास यह संदेश देता है कि जब मन सच्चा हो और श्रद्धा अटूट हो, तो मां शक्ति की कृपा से हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

धर्मनगरी हरिद्वार में पावन चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। मां शक्ति की आराधना के इस पावन पर्व पर मनसा देवी मंदिर में हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

सुबह से ही मनसा देवी पर्वत की ओर जाने वाले पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। “जय माता दी, जोर से बोलो जय माता दी, प्रेम से बोलो जय माता दी” के जयकारों के साथ भक्त माता के दरबार की ओर बढ़ते नजर आए।

भक्ति और उत्साह के साथ चढ़ते रहे भक्त
मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पैदल मार्ग से पहाड़ की चढ़ाई करते हुए मां के दरबार तक पहुंच रहे थे। कई श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए और कई स्पीकर पर माता के भजन सुनते हुए माता के दरबार की ओर बढ़ रहे थे।

भक्ति का यह दृश्य इतना मनमोहक था कि हर तरफ केवल श्रद्धा, आस्था और भक्ति की ही झलक दिखाई दे रही थी। कुछ श्रद्धालु पहाड़ी रास्तों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हुए मां के दर्शन के लिए जा रहे थे, तो कई श्रद्धालु रोपवे (उड़न खटोला) के माध्यम से भी माता के दरबार तक पहुंच रहे थे।

प्रसाद और श्रद्धा के साथ मां के चरणों में अर्पित हुईं मनोकामनाएं
माता के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित किया। कोई नारियल और चुनरी चढ़ा रहा था, तो कोई पेड़ा, बर्फी और फल माता के चरणों में अर्पित कर रहा था।

भक्तों के मन में केवल एक ही भावना थी—
“हे मां, हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करें।”
किसी ने अपने व्यापार में उन्नति की कामना की, किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि मांगी, तो कोई संतान प्राप्ति की प्रार्थना करता दिखाई दिया। कई युवा अपने विवाह और भविष्य की खुशियों के लिए भी मां से प्रार्थना करते नजर आए।

चामुंडा माता मंदिर में बांधे गए मनोकामना के धागे
मनसा देवी मंदिर परिसर में स्थित चामुंडा माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।

यहां भक्त अपनी मनोकामनाओं के साथ लाल धागा बांधते हुए दिखाई दिए। श्रद्धालु धागा बांधते समय माता का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामना बोलते और संकल्प लेते हुए कहते—

“हे मां, जब हमारी मनोकामना पूर्ण होगी, तब हम वापस आकर यह धागा खोलेंगे और आपका प्रसाद अर्पित करेंगे।”

नवरात्र के पहले ही दिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां धागा बांधते हुए दिखाई दिए।

मनसा देवी क्यों कहलाती हैं ‘मनोकामना पूर्ण करने वाली’
इस अवसर पर महंत डॉ. रवींद्र पुरी, जो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि मां का नाम मनसा देवी इसलिए है कि वह मन बात जान लेती है वह भक्तों की मनसा अर्थात मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और श्रद्धा से माता के दरबार में आता है, मां उसकी हर प्रार्थना अवश्य सुनती हैं।

भाव की भूखी हैं मां मनसा देवी
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि माता केवल भाव की भूखी हैं।

उन्होंने बताया कि जरूरी नहीं कि भक्तों को सभी मंत्र या विधि-विधान आते हों। यदि कोई भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से माता को याद करता है, तो मां उसकी हर पुकार सुनती हैं और उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं से नवरात्रों के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और अपने भाव से माता की पूजा करने का आह्वान किया।

हर दिन उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि नवरात्रों के दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से भी हजारों भक्त हरिद्वार पहुंचते हैं और मां मनसा देवी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं।

यही कारण है कि मनसा देवी मंदिर आस्था और विश्वास का एक विशाल केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम
चैत्र नवरात्रि के पहले ही दिन मनसा देवी पर्वत पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि मां शक्ति में लोगों की आस्था आज भी अटूट है।

माता के दरबार में गूंजते जयकारे, भक्ति गीतों की धुन और श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखाई देता विश्वास यह संदेश देता है कि जब मन सच्चा हो और श्रद्धा अटूट हो, तो मां शक्ति की कृपा से हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

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