भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार समिति से सीजेआइ को हटाने के 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार समिति से सीजेआइ को हटाने के 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

सीजेआइ सूर्यकांत का कहना है कि इस मामले में हितों का टकराव होगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को जस्टिस जायमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ की अध्यक्षता करते हुए कहा, ”मुझ पर हितों के टकराव का आरोप लगाया जाएगा।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले की सुनवाई एक ऐसी खंडपीठ को करनी चाहिए, जिसमें कोई न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में नहीं हो।

याचिकाकर्ताओं में से एक के लिए उपस्थित अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सुझाव पर मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि मामले को 7 अप्रैल को एक अन्य बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए और संकेत दिया कि नई बेंच में वे न्यायाधीश होंगे जो मुख्य न्यायाधीश के पद को ग्रहण करने की कतार में नहीं हैं।

खंडपीठ उन जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के कुछ प्रविधानों की वैधता को चुनौती देती हैं। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के चयन पैनल से बाहर किया था।

यह कानून, जिसे संसद ने दिसंबर 2023 में पारित किया जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति द्वारा की जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों। बेंच ने कहा था कि यह प्रणाली तब तक प्रभावी रहेगी जब तक एक नया कानून पारित नहीं होता।

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