गौरव भाटिया कहने लगे कि UPA के वक्त LPG सिलिंडर ₹1241 का था
लेकिन वो बताना भूल गए कि तब उस पर 600 रुपये की सब्सिडी भी मिलती थी।
उस वक्त कच्चे तेल का रेट $ 145 होने पर भी आम लोगों को पेट्रोल 72 रुपये लीटर मिलता रहा।
वो इसलिए कि डॉ मनमोहन सिंह जी की सरकार को दस साल में पेट्रोल- डीजल से 10 लाख करोड़ का टैक्स मिला और उस में से 9 लाख करोड़ उन्होंने सब्सिडी के रूप में वापिस कर दिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों का भार आम लोगों पर न पड़े।
दूसरी तरफ़ मोदी सरकार ने 11 साल में 42 लाख करोड़ का टैक्स पेट्रोल डीजल से कमाया और सब्सिडी दो सिर्फ 1.70 लाख करोड़!
हालांकि इस टिप्पणी में तेल में इथेनॉल के मिलावट और केरोसीन तेल के मुनाफे का गणित नहीं है जो अब भरपूर हो रहा है..
इसीलिए कच्चे तेल के भाव $ 30-60 के बीच रहने पर भी लोग 90-100 रुपए प्रति लीटर पर पेट्रोल खरीदते रहे।
2012 के पहले यदि तेल गैस के अंतराष्ट्रीय बाजार में दामों की स्थिति होती तो कल्पना करिए आपके साथ क्या होता?
और यदि आज बीजेपी के प्रवक्ता 2012 कांग्रेस सरकार की बात करते हैं तो यह सोचने का विषय होगा

