मातृ सदन, हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें ग्राम रानी माजरा में चल रहे भीषण अवैध खनन से संबंधित


दिनांक: 14 जनवरी 2026
स्थान: मातृ सदन, हरिद्वार
आज दिनांक 14 जनवरी 2026 को अपराह्न मातृ सदन, हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें ग्राम रानी माजरा में चल रहे भीषण अवैध खनन से संबंधित

एक गंभीर और सुनियोजित घोटाले का खुलासा किया गया।
मातृ सदन के संज्ञान में एक कथित अनुमति पत्र आया है, जो दिनांक 13 जून 2025 को शासन से जारी किया गया है। यह अनुमति खसरा संख्या 67, रकबा 0.745 हेक्टेयर, ग्राम रानी माजरा के लिए मत्स्य पालन हेतु तालाब निर्माण के नाम पर 6 माह की अवधि के लिए दी गई थी। मातृ सदन का स्पष्ट मत है कि यह अनुमति पत्र जनमानस के साथ किया गया एक बहुत बड़ा धोखा (Fraud) है, और इस प्रकार के घोटालों की पटकथा स्वयं मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा रची जा रही है। हरिद्वार को धामी जी अपनी कुर्सी बचाने के लिए एक उपनिवेश में परिवर्तित कर चुके हैं और यह शासन/प्रशासन के लिए एक शर्म का विषय होना चाहिए कि हाई कोर्ट के इतने स्पष्ट आदेश को, जिसको बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी माना है, उसकी भी अवहेलना करना इनके लिए एक सामान्य बात है।
यह तथ्य रिकॉर्ड पर है कि जनपद हरिद्वार में मत्स्य पालन के नाम पर दी गई लगभग सभी अनुमतियों का दुरुपयोग अवैध खनन हेतु किया गया है। नियम स्पष्ट हैं कि मत्स्य पालन हेतु तालाब निर्माण के दौरान निकली मिट्टी/मलबा/आरबीएम (RBM) को किसी भी स्थिति में भूमि से बाहर नहीं ले जाया जा सकता, उसे तालाब के किनारे ही व्यवस्थित किया जाएगा । जबकि वर्तमान मामले में यह पूरी तरह स्पष्ट है कि निकाली गई मिट्टी/आरबीएम को क्रशरों तक पहुँचाया गया, जो कि सीधे-सीधे अवैध खनन की श्रेणी में आता है।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मत्स्य निदेशालय तथा सहायक निदेशक, मत्स्य (हरिद्वार प्रभारी) को ऐसी किसी भी अनुमति की कोई जानकारी तक नहीं थी। यह पूरे तंत्र पर किया गया एक गंभीर और सुनियोजित धोखा है, विशेषकर तब, जब रायवाला से भोगपुर तक के क्षेत्र में माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार किसी भी प्रकार का खनन पूर्णतः प्रतिबंधित है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए परम पूज्य श्री गुरुदेव जी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली में व्याप्त गंभीर विरोधाभासों और असंगतियों को उजागर किया तथा इसे कानून के शासन पर सीधा हमला बताया।
आज ही मातृ सदन के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित से उनके कार्यालय में भेंट की। जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से कार्य रोकने के आदेश दिए तथा आगे आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
हालाँकि, मातृ सदन की स्पष्ट माँग है कि—

  1. उक्त कथित अनुमति/कार्य आदेश को लिखित रूप से निरस्त किया जाए।
  2. इस सम्पूर्ण घोटाले में संलिप्त सभी व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए, जिनमें प्रमुख रूप से परियोजना प्रस्तावक श्री युवराज सिंह, पुत्र कुंवरपाल, निवासी बदशाहपुर, तहसील व जनपद हरिद्वार शामिल हैं।
    मातृ सदन स्पष्ट करता है कि आगे की रणनीति एवं आंदोलनात्मक कदम जिलाधिकारी द्वारा दिए जाने वाले लिखित निरस्तीकरण आदेश तथा एफआईआर की प्रति प्राप्त होने पर निर्भर करेंगे।
    यह प्रेस नोट मातृ सदन, हरिद्वार की ओर से जारी किया जा रहा है।

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