सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद आवास एवं विकास परिषद ने मेरठ के शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट के 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया।
दावा किया जाता है कि इस बाजार से प्रतिमाह 20 करोड़ रुपये का कारोबार होता था।
भारी पुलिस बल और सात अलग-अलग टीमों के साथ चले अभियान के दौरान क्षेत्र में तनाव और आक्रोश देखा गया।
मेरठ की सेंट्रल मार्केट की सीलिंग को लेकर बुधवार को दूसरे दिन भी हंगामा हुआ।
अफसर सीलिंग करने पहुंचे तो नाराज कारोबारी सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान एक कारोबारी तो बेहोश हो गए। साथी कारोबारी उन्हें टांगकर एम्बुलेंस तक ले गए। उनका जिला अस्पताल में इलाज किया गया। 2 घंटे बाद कारोबारी को घर भेज दिया जाएगा।
दुकानों को सील होता देखकर महिलाएं फूट-फूट कर रोने लगीं। एक कारोबारी ने कहा-
सरकार ने हमें मार दिया। आवास विकास के अधिकारियों ने बेईमानी की। हमें गुमराह किया। 70 करोड़ रुपए वसूलने के बाद भी हमारे प्रतिष्ठानों को सील किया जा रहा ।
इधर, हंगामे की सूचना पर सपा नेता जीतू नागपाल पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस पर ADM सिटी ब्रजेश सिंह भड़क गए। कहा- राजनीति अपने घर जाकर करना। यहां बात करनी है, तो व्यापारियों की करो। राजनीति करोगे, तो जेल भेज दूंगा। इस पर सपा नेता ने कहा- हम भी व्यापारी हैं। व्यापारी हित की ही बात करने आए हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट में 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया है। मंगलवार शाम कारोबारियों को लिखित रूप में आदेश मिला। बुधवार सुबह आवास विकास परिषद की 7 टीमों ने सुधा हॉस्पिटल से सीलिंग की कार्रवाई शुरू की। शाम तक सभी 44 दुकानें सील कर दी गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद और आवास विकास के चेयरमैन पी. गुरुप्रसाद को तलब किया था। दोनों को जमकर फटकार लगाई थी।
कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर से पूछा- किस आधार पर आपने ध्वस्तीकरण को रोकने का आदेश दिया। पूर्व कमिश्नर की तरफ से बताया गया कि कोर्ट के आदेश की तामील यानी दुकान 661/6 के ध्वस्तीकरण के बाद कारोबारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक के कुछ मिनट्स तैयार किए गए थे। ये सुझाव थे, आदेश नहीं।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इसे आप मिनट्स कहते हैं। गुरुप्रसाद ने कोर्ट को बताया था कि कमिश्नर के आदेश के बाद वो कार्रवाई नहीं कर सके। कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर को अपनी गलती मानते हुए स्पष्टीकरण देने का भी आदेश दिया

