मलूकदास द्वारा लिखा एक दोहा आज कल हरिद्वार जिले में काफी चर्चित हो रहा हैअजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम॥


मलूकदास द्वारा लिखा एक दोहा आज कल हरिद्वार जिले में काफी चर्चित हो रहा है
अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम॥
जिसका अर्थ है :यदि कोई किसी की नौकरी न करे तब भी ईश्वर उनके जीवन की व्यवस्था कर देते हैं
लेकिन हरिद्वार जिले में इसका अर्थ अलग ही निकल कर आ रहा है अगर किसी को रोजगार नहीं मिले तो अनपढ़, शराबी, गैंगस्टर, वन कटाई माफिया, अपहरणकर्ता अर्थात फिरौती मांगने का काम करने वाले बन जाते है पत्रकार 👇

प्रशासन ध्यान दे कि ऐसे व्यक्तियों पर जल्द करे करवाई
जनता के साथ हो रहा है खिलवाड़
जहां वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा क्षेत्र की जनता को बना दिया है सर्वोपरि अर्थात जनता की सेवा ही हमारा परम् कर्त्तव्य है वहीं अनपढ़ शराबी जनता को कर रहे है लूटने का काम 👇

*👉एक सवाल क्या कोई संस्था जिस अखबार या चैनल से ये लोग जुड़ते है तो संस्था का मालिक क्यों नहीं मांगता इन लोगों से चरित्र प्रमाण पत्र और क्यों नहीं मांगा जाता इन लोगों से शिक्षा से जुड़े दस्तावेज
आखिरकार किन तथ्यों पर बना दिया जाता है इन लोगों को पत्रकार और किस हक से ऐसे लोग उच्च अधिकारी के पास के लेते है सवाल
प्रशासन ध्यान दे इन लोगों पर जब ये लोग सवाल पूछते है तो क्या इन लोगों को उस सवाल के बारे में संपूर्ण जानकारी भी है

👉*एक नजर इधर भी इनके कामों पर: सुबह ही ये लोग देखते फिरते है कि कहा पर हो रहे है
*1 अवैध निर्माण, भंडार आ जबकि इन लोगों को ये तक पता नहीं होता निर्माण अवैध है या वेद

👉2 कौन सा पुलिस कर्मी ड्यूटी पर बैठा है या अच्छे से ड्यूटी नहीं कर रहा है जबकि ड्यूटी कैसे करनी है कैसे नहीं और क्या नियम है क्या नहीं इन लोगों को नहीं पता 👉3 जमीनों पर करते है अवैध रूप से कब्जा और अपने आप को बताते है वरिष्ठ पत्रकार जबकि जमीन की क्या रूप रेखा है और वरिष्ठ किसे कहते है नहीं पता
👉4 कुछ तो ऐसे भी जो अपने आप को कलम का सिपाही बताते है जबकि कलम चलानी भी नहीं आती और फोन पर बोल बोल कर लिखते है शब्द वाह रहे मेरे हरिद्वार 👉5 सबसे खास : जनता की आवाज को उठाने के लिए जनता जाती है पत्रकारों के पास वही ऐसे अनपढ़ और शराबी लोग सोशल मीडिया पर आवाज उठाने के लिए भी जनता से लेते है पैसे
ये तो वही बात हुई अंधों में काना राजा यानी खुद abcd पढ़ी नहीं और जनता को करते है गुमराह

पत्रकारिता जैसे साफ महकमे को किया जा रहा है तार तार जिस कलम का सहारा लेकर लोगों की आवाज उठाने का कार्य होता है, उसी कलम को कुछ अनपढ़ यानी बिना पढ़े लिखे शराबी रिश्वतखोर और बिना कुछ ज्ञान के सरकारी महकमों पर धाक चलाने वाले अनपढ़
पत्रकारिता जैसे साफ महकमे को कर रहे है गंदा

🧐अनपढ़ शराबी और कलम को कभी हाथ में न पकड़ने वालों के लिए पत्रकारिता क्या होती है एक नजर में 🧐

👉👉पत्रकारिता एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण महकमा (क्षेत्र) है, जो समाज की आँख-कान बनकर सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है, लोकतंत्र को मजबूत बनाता है और जनता को जागरूक करता है; यह निष्पक्षता, तथ्यों और संतुलन जैसे सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए, लेकिन आजकल व्यावसायिकता और गलत सूचना के कारण यह संकट में भी है,

👉पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, जो विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ मिलकर काम करती है, और जनता को जागरूक करने, सरकार से सवाल पूछने और समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करती है, जिससे एक सशक्त लोकतंत्र की नींव मजबूत होती है।

नैतिक मानक: पत्रकारिता में सटीकता, संतुलन, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा जैसे उच्च नैतिक मानकों का पालन करना ज़रूरी है

खबर जनता और देश के हित में खबर चलाने का एक मात्र उद्देश्य है कि कलम का सिपाही सिर्फ कलम चलने वाले को कहना चाहिए न कि जिसने का कभी कलम पकड़ी हो न ह कुलदीप शर्मा

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