पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री जी के सानिध्य में सर्वजन कल्याण के लिए श्री दरिद्र भंजन महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस भागवत आचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी ने कथा का श्रवण कराते हुए बताया श्रीमद् भागवत कथा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से एवं मां गंगा जी की उत्पत्ति भगवान विष्णु के चरणों से हुई है

प्रेस विज्ञप्ति भागवत कथा तृतीय दिवस 9 अप्रैल 2026
श्री दारिद्र भंजन महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार
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पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री जी के सानिध्य में सर्वजन कल्याण के लिए श्री दरिद्र भंजन महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस भागवत आचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री जी ने कथा का श्रवण कराते हुए बताया श्रीमद् भागवत कथा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से एवं मां गंगा जी की उत्पत्ति भगवान विष्णु के चरणों से हुई है

शास्त्री जी ने बताया जब भगवान विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को चतुश्लोकी भागवत का ज्ञान दिया यही चतुश्लोकी भागवत का ज्ञान ब्रह्माजी ने नारदजी को दिया नारद जी ने वेदव्यास जी को एवं वेदव्यास जी ने चतुश्लोकी भागवत से श्रीमद्भागवत महापुराण जिसमें बारह स्कंध तीन सो पेंतीस अध्याय अठारह हजार श्लोक का निर्माण किया और अपने पुत्र सुखदेव मुनि को श्रीमद्भागवत महापुराण का ज्ञान दिया सुखदेव जी ने राजा परीक्षित की सभा में इस ज्ञान को सभी में बांटा और आज सभी लोग श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में डुबकी लगाकर के अपना एवं अपने पितरों का कल्याण करते हैं ठीक इसी प्रकार से शास्त्री जी ने बताया राजा बलि स्वर्ग प्राप्ति के लिए जब सो यज्ञ का संकल्प लेकर के यज्ञ करना प्रारंभ करते हैं तब भगवान विष्णु वामन बनकर राजा बलि से तीन चरण पृथ्वी की याचना करते हैं राजा बलि ने जब तीन चरण पृथ्वी दान करने का संकल्प किया तब वामन भगवान ने प्रथम चरण बढ़ाना प्रारंभ किया तो ऊपर के साथतो लोको को पार करते हुए ब्रह्मांड का भेदन कर दिया जिससे एक जल की धार भगवान के चरणों से निकली उस जल धार को ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में धारण कर दिया राजा सगर के साठ हजार पुत्र कपिल देव के क्रोध से जलकर के भस्म हो गए उन सब के उधार के लिए राजा सगर के वंश में अनेकों अनेकों राजाओं ने मां गंगा जी को पृथ्वी पर लाने के लिए तप किया भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर के ब्रह्मा के कमंडलू से मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से होती हुई भागीरथी नाम से पृथ्वी पर आई और राजा सगर के साठ हजार पुत्रों का उद्धार कर दिया शास्त्री जी ने बताया विष्णु मुखी भागवती गंगा एवं विष्णु पदी भागीरथी गंगा दोनों की दोनों जीव का कल्याण करने के लिए ही इस पृथ्वी पर आई है जो भागवत कथा का श्रवण करता है एवं मां गंगा जी में स्नान करता है दोनों का ही कल्याण मांगा कर देती है इस अवसर पर मुख्य यजमान कुसुम गुप्ता,दिनेश गुप्ता,सुनीता गुप्ता,शिमा गुप्ता,सोमेश गुप्ता,सरिता गुप्ता,अजय गुप्ता,कोमल गुप्ता,विजय गुप्ता,कामनी गुप्ता,विकाश गुप्ता,रुचि गुप्ता,रिंकू गुप्ता,डीके गुप्ता,रितेश गुप्ता,नीरज शर्मा,विमल गुप्ता,सुनीता गुप्ता,सुनील गुप्ता,सत्यम,शिवाय,चिराग, कार्तिक,आरवी,माधव, अनिया,पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री,पंडित रमेश चंद्र गोनियल,पंडित राजेंद्र पोखरियाल,पंडित नीरज कोठारी आदि ने भागवत जी का पूजन संपन्न किया

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