उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया एक बड़े विवाद में तब्दील हो गई है।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लोकसभा में दिए गए स्पष्टीकरण के बाद, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बड़ा दावा किया है कि राज्य में करीब 70 लाख उपभोक्ताओं के घरों में बिना उनकी सहमति के जबरन ‘प्रीपेड मोड’ में मीटर लगा दिए गए हैं।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, यह कार्रवाई राष्ट्रीय विद्युत कानून और उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
नियमानुसार, मीटर प्रीपेड लगेगा या पोस्टपेड, इसका चयन पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन यूपी में बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं को विकल्प दिए बिना ही उन पर प्रीपेड सिस्टम थोप दिया है।
उपभोक्ता परिषद ने अब प्रदेश सरकार और पावर कॉर्पोरेशन से मांग की है कि जिन उपभोक्ताओं से सहमति नहीं ली गई, उनके मीटर तत्काल ‘पोस्टपेड’ मोड में बदले जाएं।
इस मामले को लेकर परिषद 6 अप्रैल को विद्युत नियामक आयोग के समक्ष अपना कड़ा विरोध और प्रस्ताव दर्ज कराएगी। केंद्रीय मंत्री ने भी साफ किया है कि विद्युत नियम 2020 के तहत उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना नीति है, न कि जबरन नियम लागू करना।
परिषद ने पावर कॉर्पोरेशन से अपने उस फैसले को भी वापस लेने की मांग की है जिसमें नए कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में देने की बात कही गई थी।

