1 डॉलर = 95.20 रुपये। यह निचला स्तर है जिसको रुपये ने आज छू लिया। अब तक ऐसा नहीं हुआ था। और रुपये की ऐसी गिरावट पर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में सोमवार को बोलीं- ‘रुपया ठीक चल रहा है’। क़रीब साढ़े तीन साल पहले अक्टूबर 2022 में भी जब रुपया डॉलर के मुक़ाबले 82 पर था तो इस गिरावट पर पूछे गये सवाल पर उन्होंने कहा था कि ‘रुपया कमजोर नहीं हो रहा, बल्कि डॉलर मज़बूत हो रहा है’। बाद में उन्होंने कहा था कि रुपया अपना स्तर खुद पा लेगा। तो मोदी सरकार से पहले यूपीए सरकार में रुपये 62 के स्तर पर था तो क्या उनका यही रुख था? तब खुद नरेंद्र मोदी क्या कहते फिरते थे?
इन सवालों के जवाब जानने से पहले यह जान लें कि रुपये की गिरावट सोमवार को किस तरह हुई और इसको लेकर विपक्षी दलों ने क्या कहा। दरअसल, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपया पहली बार 95 रुपये के स्तर को छू गया है। ईरान युद्ध के बाद रुपया 4.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। 27 मार्च 2026 को यह 94.82 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को अंतरबैंक बाजार में यह 95.20 रुपये पर चला गया था।
इस गिरावट के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत है और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया ‘बिल्कुल ठीक चल रहा है’। लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, हमारी वित्तीय स्थिति अच्छी है। पूरी दुनिया हमारे राजकोषीय घाटे के प्रबंधन की तारीफ़ कर रही है। हमारे विदेशी मुद्रा भंडार बहुत मज़बूत हैं। अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया ठीक चल रहा है… बिल्कुल ठीक चल रहा है।’
निर्मला सीतारमण ने लिखित जवाब में बताया कि रुपया अकेला नहीं गिर रहा है। वेस्ट एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद कई एशियाई मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।
वित्त मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने हमला किया। इसने उनके बयान पर तंज कसा और लिखा कि ‘गजब फर्जी लोग हैं’।
2012-13 में ₹60 रुपया था तब महंगा दिखता था आज 95 रुपए हैं अब ठीक है हमारे भाजपा सरकार

