गीतकार अरुण पाठक की एल्बम इन्द्र धनुष का लोकार्पणकलाकार की संवेदना से होता है कला का विस्तार- डा. निशंकहरिद्वार।‌ “


गीतकार अरुण पाठक की एल्बम इन्द्र धनुष का लोकार्पण
कलाकार की संवेदना से होता है कला का विस्तार- डा. निशंक
हरिद्वार।‌ “

एक कलाकार जब अपने जीवन के पल-पल की अनुभूतियों, संवेदनाओं तथा अनुभवों को जीता है, तो उससे उसकी कला का बहुमुखी विकास और विस्तार तो होता ही है, सम्पूर्ण समाज भी उससे लाभान्वित होता है।”


     उक्त विचार भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री तथा उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने बी.एच.ई.एल. के सैक्टर-2 स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के विशाल माधव भवन में संस्कार भारती की हरिद्वार महानगर इकाई तथा चेतना पथ फाउंडेशन की ओर से भारतीय संस्कृति की संंवाहक ‘चेतना पथ’ के छठे वर्ष के प्रवेशांक का विमोचन तथा नगर के कवि एवं साहित्यकार अरुण कुमार पाठक के सात गीतों के संगीतबद्ध गीतों के संग्रह ‘इन्द्रधनुष’ का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि- जिसको भी ईश्वर ने कला-संस्कृति व साहित्य की किसी भी विधा में कोई क्षमता व योग्यता दी है, उसे उसका समाजहित में अधिक से अधिक वितरण करना चाहिये इससे उस व्यक्ति व कला का विकास होता है तथा नये सृजन को भी गति मिल ती है। ऐसा न करने से वह कला स्वतः ही क्षीण हो जाती है।”
     इसी अवसर पर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने कहा कि, “हरिद्वार तथा उसके आसपास में ही कला, संस्कृति व साहित्य की अनेक सभी विधाओं में अनेक प्रतिष्ठित संस्थाएँ, विभूतियाँ तथा उदीयमान प्रतिभाएँ छिपी हुई हैं। विगत पाँच वर्षों में इन सबको एक पहचान तथा मंच प्रदान करके ‘चेतना पथ’ ने समाजोत्थान में उल्लेखनीय भूमिका का निर्वाह किया है।” कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भेल के कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) बलबीर तलवार ने कहा कि स्वस्थ साहित्य व स्वस्थ कला हमेशा समाज को समृद्ध बनाती है। अतः कला का सृजन सकारात्मक व पूरी निष्ठा व ईमानदारी से होना चाहिये।” ‘चेतना पथ’ सम्पादक अरुण पाठक ने कहा कि “साहित्य और कला के उनके विगत सभी प्रकल्पों का एक मात्र उद्देश्य हरिद्वार तथा आसपास की कला और कलाकारों को एक अलग पहचान, सम्मान व मंच उपलब् कराना है।
देर शाम तक चले इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में देहरादून से पधारे विख्यात ग़ज़ल व सुगम संगीत गायक व सारेगामा विजेता रहे अनुराग शर्मा ने लोकप्रिय गज़ल ‘हम तेरे शहर में आये हैं, मुसाफिर की तरह’ तथा मुम्बई में ‘खजाना’ तथा छिंदवाड़ा (म.प्र.) में ‘तरन्नुम नवाज़ जैसे अखिल भारतीय ख़िताब जीत चुके आकाशवाणी व दूरदर्शन कलाकार विपुल रुहेला ने ‘ऐ मोहब्बत तेरे नाम पे रोना आया’ पेशकर के जबदस्त तालियाँ लूटीं, तो लोकार्पित गीत संग्रह ‘इन्द्रधनुष’ से सुमन पंत ने ‘लोग बिछड़े मगर वो‌ मिले भी तो हैं’, अरुण पाठक ने ‘उम्रभर साथ निभाने का ख़याल आया था, अखिल भारतीय युवा महोत्सव में विजेता रह चुके निपुन जिन्दल ने ‘कभी ग़ैरों का रुख़ करके मुझे मत भूल जाना तुम’ उद्भव आर्या ने ‘आओगे जब तुम पास हमारे, दिल से दिल की बातें होंगी’ की मधुर व कर्णप्रिय प्रस्तुतियाँ दीं।
इसके पूर्व माँ भारती, देवी सरस्वती तथा ऊँकार के विग्रहों के सम्मुख दीप प्रज्जवलन, पुष्पार्पण तथा अर्चना झा ‘सरित’ की वाणी वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अर्चना झा ने मुख्य एवं सभी विशिष्ट अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का कुशल व सफल संचालन देहरादून से पधारीं डा. भारती मिश्रा ने किया। मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों को शाल, पुष्प गुच्छ, रुद्राक्ष माला तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया, जबकि ‘चेतना पथ’ के सम्पादक मंडल, सहयोगी संस्थाओं, सलाहकार मंडल तथा विशिष्ट सहयोगीगण को स्मृति चिन्ह तथा गुलाब भेंट किये गये।
       कार्यक्रम में पर्यावरणीय पर्यटन परिषद् के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश जमदग्नि, सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य लोकेन्द्र अंथवाल, हिमालय विरासत ट्रस्ट से आशना नेगी कांडियाल, शिक्षाविद्  विजयेन्द्र पालीवाल, डा. नरेश मोहन, समाजसेवी विशाल गर्ग, मीनल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार डा. राधिका नागरथ, सन्तोष साहू, ललित जिंदल, डा. श्वेता सरन, आर्ट आफ लिविंग के प्रशिक्षक तेजिन्दर सिंह, विश्व चैम्पियन पावरलिफ्टर संगीता राणा, योगाचार्य डा. प्रिया आहूजा, कवि डा. सुशील त्यागी, प्रेम शंकर शर्मा ‘प्रेमी’, अरविन्द दुबे, शशिरंजन समदर्शी, प्रभात रंजन, साधुराम ‘पल्लव’, श्रीजा त्रिपाठी, ज्योति भट्ट, दीप शिखा अध्यक्ष डा. मीरा भारद्वाज, रेखा सिंघल, कवियित्री राजकुमारी ‘राजेश्वरी’, आशा साहनी, वृंदा वाणी, मीनू चावला, तथा कंचन प्रभा गौतम विशेषरूप से उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *